बजट 2018 पर क्यों बरस पड़ी मायावती?

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लखनऊ:  आज 1 फरवरी के दिन  मोदी सरकार के सत्र का  आखिरी बजट  पेश किया गया  जिसको लेकर बसपा पार्टी की अध्यक्ष मायावती जी ने बजट को गरीब विरोधी बताते हुए कहा कि इससे अमीरों तथा $गरीबों के बीच की खाई और बढ़ेगी।

मायावती ने आज यहां जारी बयान में कहा कि आज संसद में पेश प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार के अन्तिम आम बजट गत वर्षों की तरह ही केवल लच्छेदार बातों वाला छलावा है। इस बजट से अमीरों तथा $गरीबों के बीच की खाई और बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि बजट में गरीबों के लिये कुछ नही है। बजट केवल $गरीब-विरोधी एवं धन्नासेठ-समर्थक है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को अपनी जुमलेबाजी बन्द करके तथ्यों तथा तर्कों के आधार पर यह जरूर बताना चाहिए कि अच्छे दिन का वायदा करके जनता को धोखा क्यों दिया।

बसपा अध्यक्ष ने कहा कि केवल अलंकृत भाषणों एवं लच्छेदार बातों से $गरीबों तथा मेहनतकश जनता का पेट नहीं भरने वाला है। एक जिम्मेदार तथा जवाबदेह सरकार की तरह उनकी सत्यता का वास्तविकताओं का लेखा-जोखा भी जनता की संतुष्टि के लिये बताना चाहिये। अब तक केवल हवा-हवाई बयानबाजी ही की गयी है।

प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि बजट वास्तविक भारत के हितों की रक्षा करने वाला नहीं है। ग्रामीण भारत को सबसे ज्यादा सम्मानजनक जीवन जीने के लिये उसकी अपनी क्षमता के अनुसार बेहतर रोजगार के अवसर मुहैया कराने की कारूरत है। उन्हें ‘पकोड़ा बेचकर’ रोजगार अर्जित करने के सलाह की जरूरत नही है। करोड़ों शिक्षित बेरोजगार मजबूरी में पहले से ही पकोड़ा तथा चाय बेचने वाला काम कर रहे हैं। यह मोदी सरकार की विफलता का जीता-जागता प्रमाण है।

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की प्राथमिकतायें देश के करोड़ों $गरीबों, मजदूरों, किसानों तथा अन्य मेहनतकश लोगों के हितों को साधने वाली कतई नहीं रही है। विकास के जो दावे सरकार द्वारा किये जाते रहे हैं उसका थोड़ा भी लाभ इन वर्गों के लोगों को नहीं मिल पाया है।

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