विवेक मर्डर केस: पुलिस ने बोले ये पांच झूठ, ऐसे कराई सरकार की फजीहत

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लखनऊ। Apple के अधिकारी विवेक तिवारी की हत्या में झूठ की दलदली जमीन पर तैयार की गई लखनऊ पुलिस की थ्योरी पूरे महकमे को ले डूबी है। वारदात होने से लेकर हर पल लखनऊ पुलिस झूठे हथकंडे और फजीहत होती चली गई।

1…. जहां राजधानी के थानों में मामूली चोरी,गुमशुदगी की एफआईआर लिखाना बिना घूस, बिना सिफारिश के संभव नहीं है। उस लखनऊ पुलिस ने हत्या जैसी गंभीर घटना में गजब की तेजी दिखाई। वारदात रात में 1-2 बजे के बीच हुई। पुलिस ने 2 घंटे बाद ही घटना की अकेली चश्मदीद की तरफ़ से गोमती नगर थाने में अज्ञात पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली। पुलिस ने ना तो मृतक विवेक तिवारी के परिवार की तलाश की और ना ही उनके परिवार के आने का इंतजार किया।

2….घटना की अकेली चश्मदीद सना खान ने थाने पहुंचते ही लखनऊ पुलिस को मृतक का नाम और पेशा बता दिया था। आखिर लखनऊ पुलिस को ऐसी क्या जल्दी थी जो सुबह होने का इंतजार भी नहीं कर पाई। लखनऊ पुलिस अगर मृतक की गाड़ी के कागजात से ही उसके घर वालों की तलाश करती तो पहली f.i.r. लिखने से पहले घर वाले सामने आ जाते। आखिर लखनऊ पुलिस ने विवेक तिवारी के परिवार की तलाश किए बिना एफआईआर लिखने में जल्दबाजी क्यों की?

3….लखनऊ पुलिस ने एफआईआर लिखने में भी सिपाही को बचाने की पूरी प्लानिंग की थी। सना खान की तरफ से दर्ज कराई गई पहली एफआईआर की चौथी लाइन में लिखा गया…. मुझे लगा जैसे की गोली चली, हमने वहां से गाड़ी आगे बढ़ाई, आगे हमारी गाड़ी अंडर पास दीवार से टकराई और विवेक के सिर से काफी खून बहने लगा…. दर्ज कराई गई एफआईआर की चौथी लाइन के इन 29 शब्दों में पुलिस की साजिश शामिल थी। पुलिस का प्लान था कि पोस्टमार्टम में अगर विवेक तिवारी के शव से सिपाही के द्वारा चलाई गई 9mm की गोली का टुकड़ा नहीं मिलता है तो वह एक नई थ्योरी देते। एसएसपी लखनऊ का तब बयान कुछ ऐसा होता …गश्त कर रहे सिपाहियों को विवेक तिवारी ने टक्कर मारी… सड़क पर गिरे सिपाहियों ने गाड़ी को रोकने के लिए हवाई फायर किया…. गोली चलने की आवाज सुनकर हड़बड़ाए विवेक तिवारी की गाड़ी अंडरपास की दीवार से टकरा गई और एक्सीडेंट में विवेक तिवारी की मौत हो गई.. लखनऊ पुलिस का यह झूठ भी नहीं चला।

4… वारदात के 2 घंटे बाद ही पुलिस की स्क्रिप्टेड एफआईआर दर्ज होने के बाद लखनऊ पुलिस ने इस घटना को नया रंग देने की एक और कोशिश की। सुबह 11बजे गोली मारने वाला आरोपी सिपाही प्रशांत चौधरी स्ट्रेचर पर बेहोशी की हालत में लोहिया अस्पताल पहुंच गया। बेहोशी की हालत में ही आरोपी सिपाही ने टक्कर मारकर भागने की कहानी बताना शुरू कर दिया। लेकिन प्रशांत चौधरी के स्ट्रेचर पर बेहोशी के झूठ की 6 घंटे बाद ही पोल खुल गई। जो सिपाही 11बजे स्ट्रेचर पर बेहोशी की हालत में था वही सिपाही 6 घंटे बाद गोमतीनगर नगर थाने में अपनी महिला सिपाही पत्नी के साथ मृतक विवेक तिवारी पर f.i.r. लिखाने के लिए हंगामा करने लगा।

5… इस झूठ के पुलिंदा में जो सबसे बड़ा झूठ बोला गया वह बड़े साहब का था। ऐसा झूठ जिसने यूपी पुलिस के मुखिया और मुख्यमंत्री की साख पर सवाल खड़े कर दिए। दोपहर 3 बजे एसएसपी लखनऊ ने बयान दिया कि दोनों आरोपी सिपाही गिरफ्तार कर जेल भेज दिए गए। लेकिन इस बयान की 2 घंटे में ही धज्जियां उड़ गई। जिस सिपाही को एसएसपी साहब जेल भेजने की बात कर रहे थे वो सिपाही तो थाने में मीडिया के सामने विभाग के खिलाफ बयानबाजी करने लगा।

यह वो 5 झूठ हैं,जो कहे तो लखनऊ पुलिस और उसके अफसर ने थे लेकिन फजीहत सरकार की हो गई।

source: facebook wall

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