विकास दुबे जिंदा है!

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लखनऊ। विकास दुबे अभी मरा नहीं। वह बस कुछ छण के लिए शांत हुआ है। एक दिन फिर वह आएगा। लेकिन इस बार विकास बनकर नहीं बल्कि किसी और नाम से। जी हां यह सच है क्योंकि आपने आज एनकाउंटर के बाद जो मृत शरीर देखा है वह विकास दुबे का नहीं बल्कि उस पेट एनीमल का था जो लोगों के इशारों पर नाचता था। अच्छी बात ये है कि आज एक दुर्दान्त अपराधी मारा गया, लेकिन दुर्भाग्य है कि इस बार भी वो पनाहगार सामने नहीं आ सके जो ऐसे सांपों को पालते हैं। विकास दुबे की मौत के साथ कई राज दफन हो गए। साथ ही कई सवाल भी।

उत्तर प्रदेश पुलिस ने शुक्रवार सुबह बताया कि दुर्दान्त दुबे को उज्जैन से कानपुर ले जाने के दौरान गाड़ी का एक्सीडेंट हो गया। उसने पुलिसकर्मियों से हथियार छीनकर भागने की कोशिश की और फायरिंग कर दी। पुलिस ने भी आत्म सुरक्षा में गोली चलाई और विकास दुबे की गोली लगने से मौत हो गई। ये कहानियां अक्सर रील राइफ में देखने को मिलती हैं। खासकर साउथ की पिच्चरों में। बहरहाल हर बार की ही तरह इस बार भी एनकाउंटर पर सवाल उठ रहे हैं।

मौत के साथ दफन हो गए ये सवाल
जो आदमी खुद सरेंडर करने आया वह पुलिस गिरफ्त से आखिर क्यों भागेगा?
जरा सोचिए 15 से 20 प्रशिक्षित पुलिसकर्मियों के बीच में घिरा विकास दुबे भागा कैसे?
विकास दुबे की गाड़ियो के साथ चल रही मीडिया को पहले ही क्यों रोक दिया गया?
सिर्फ विकास की ही गाड़ी कैसे पलटी?
इतनी अच्छी रोड पर विकास की गाड़ी कैसे पलट गई।
क्या विकास को हथकड़ी नहीं लगाई गयी थी?
क्या पुलिसकर्मियों से पिस्टल इतनी आसानी से छीनी जा सकती है?
पुलिस ने विकास को घेर कर पकड़ने की कोशिश क्यों नहीं की?
यह एनकाउंटर भी कानपुर के पास ही क्यों हुआ? इससे पहले विकास के साथी प्रभात मिश्रा को जब पुलिस कानपुर ला रही थी, उसमें भी पुलिस ने यही कहा था कि प्रभात ने कानपुर पहुंचते ही भागने की कोशिश की। पुलिस ने प्रभात को एनकाउंटर में ढेर कर दिया था।
क्या विकास का मध्य प्रदेश में सरेंडर करना एक चाल थी?
क्या विकास दुबे किसी बड़े गहरे राज से पर्दा उठा सकता था।

बहरहाल ये सारे राज विकास दुबे के साथ दफन हो गए। इस मसले पर राजनीति भी जमकर हो रही है। प्रियंका वाड्रा ने कहा कि’उप्र की क़ानून-व्यवस्था बदतर हो चुकी है। राजनेता-अपराधी गठजोड़ प्रदेश पर हावी है। कानपुर कांड में इस गठजोड़ की सांठगांठ खुलकर सामने आई। कौन-कौन लोग इस तरह के अपराधी की परवरिश में शामिल हैं- ये सच सामने आना चाहिए।’

बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा कि कानपुर पुलिस हत्याकाण्ड की तथा साथ ही इसके मुख्य आरोपी दुर्दान्त विकास दुबे को मध्यप्रदेश से कानपुर लाते समय आज पुलिस की गाड़ी के पलटने व उसके भागने पर यूपी पुलिस द्वारा उसे मार गिराए जाने आदि के समस्त मामलों की माननीय सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए।
वहीं अखिलेश यादव ने कहा कि दरअसल ये कार नहीं पलटी है, राज़ खुलने से सरकार पलटने से बचाई गयी है।इन सब के बीच  योगी सरकार ने ये तो साफ कर दिया है कि अब यूपी में अपराधियों को उनकी सही जगह पर पहुंचना तय है। बहरहाल दुर्दान्त दुबे आज इतिहास के पन्नों में कैद हो गया लेकिन आने वाले कल में फिर एक दुर्दांत आएगा क्योंकि अभी वो आस्तीने सुरक्षित हैं जहां ऐसे दुर्दांत सर्प पाले जाते हैं।

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