विपंक्ष का महाभियोग प्रस्ताव खारिज, एससी जाएगी कांग्रेस

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्र के खिलाफ विपक्ष के महाभियोग प्रस्ताव को उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू ने सोमवार को खारिज कर दिया। दस पन्ने के अपने आदेश में सभापति ने कहा है कि मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ लगाए गए आरोप पुख्ता नहीं पाए गए। कांग्रेस की अगुवाई में सात दलों ने शुक्रवार को सभापति को नोटिस देकर मुख्य न्यायाधीश को पद से हटाने की प्रक्रिया शुरू करने की मांग की थी। विपक्ष ने पांच आरोप लगाए थे। सभापति ने सभी आरोपों का बिंदुवार जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि सभी आरोप अनुमान पर आधारित हैं और इनमें न्यायपालिका की स्वतंत्रता को कम करने वाली प्रवृत्ति गंभीर रूप से दिखती है।

प्रस्ताव में खामियों का जिक्र करते हुए नायडू ने कहा है कि सदस्यों ने जो आरोप लगाए हैं वे खुद अपनी दलीलों के प्रति आश्वस्त नजर नहीं आ रहे हैं। पुख्ता और विश्वसनीय तथ्यों के अभाव में प्रस्ताव को स्वीकार करना अनुपयुक्त और गैरजिम्मेदाराना होगा। उन्होंने कहा है कि संविधान के अनुच्छेद 124 (4) के तहत न्यायाधीश को पद से हटाने लिए कदाचार को साबित करने वाले आधार पेश करना अनिवार्य शर्त है।

वित्तीय अनियमितता के आरोप अनुमानपरक और महज शक पर आधारित हैं
पांच न्यायाधीशों की पीठ ने निर्धारित किया है कि मुख्य न्यायाधीश ही रोस्टर के प्रमुख हैं
गलत तरीके से जमीन लेने के आरोपों के पक्ष में कोई तथ्य नहीं दिए गए

क्या कहा कपिल सिब्बल ने
फैसला असंवैधानिक, गैरकानूनी और गलत सलाह पर आधारित है। इससे लोगों का विश्वास चकनाचूर हो गया है।

क्या कहा अमित शाह ने
महाभियोग का कांग्रेस का कदम हर उस संस्थान को कमजोर करने की प्रवृति का हिस्सा है जो अपनी पहचान अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए प्रयासरत है।

राज्यसभा सभापति वेंकैया नायडू ने क्या कहा
मुख्य न्यायाधीश पर लगे आरोपों को संविधान के अनुच्छेद 124 (4) के दायरे से बाहर पाए जाने के कारण जांच के योग्य नहीं माना जा सकता। सिद्ध कदाचार और अक्षमता के आधार पर ही किसी न्यायाधीश को हटाया जा सकता है।-

नायडू ने नोटिस के तुरंत बाद प्रेस कांफ्रेंस कर जानकारी सार्वजनिक करने पर भी सवाल उठाए। नियमानुसार जांच पूरी होने व सदन में नोटिस पेश होने तक तथ्यों को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता।

कांग्रेस ने फैसले को असंवैधानिक करार दिया है और सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही है। पार्टी नेता कपिल सिब्बल ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार नहीं चाहती कि कदाचार के जो आरोप सामने आए हैं, उनकी जांच हो। कांग्रेस ने यह उम्मीद जताई कि आरोपों की पूरी जांच होगी।

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