केंद्रीय विद्यालय में ‘दलित’ शब्द के इस्तेमाल पर रोक

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नई दिल्ली। केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने राज्यों को सरकारी दस्तावेजों में अनुसूचित जाति समुदाय के लोगों के लिए दलित शब्द का इस्तेमाल न करने का निर्देश जारी किया है। मंत्रालय की ओर से राज्य सरकारों को जारी पत्र में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा गया है कि ‘दलित’ शब्द का संविधान में कहीं कोई उल्लेख नहीं है। इसलिए सरकारी दस्तावेजों में इसका इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। राज्यों के मुख्य सचिवों के नाम से हाल ही में जारी इस पत्र में कहा गया है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 10 फरवरी 1982 को इस संबंध में एक पत्र जारी किया था।इसमें केंद्र शासित प्रदेशों से अनुसूचित जाति से ताल्लुक रखने वाले लोगों के जाति प्रमाण-पत्र में जाति के साथ ‘हरिजन’ शब्द का इस्तेमाल न करने का निर्देश जारी किया गया था।

वर्ष 1990 में भी इसी तरह का एक आदेश जारी हुआ था।उसमें सभी सरकारी दस्तावेजों में अनुसूचित जाति के लोगों के लिए सिर्फ उनकी जाति लिखने का निर्देश जारी किया गया था। संसदीय समिति के निर्देश पर केंद्र सरकार ने वर्ष 2012 में एक बार फिर उक्त निर्देशों का पालन करने के लिए पत्र लिखा था। अब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और इनसे संबद्ध संस्थानों के दस्तावेजों में अनुसूचित जाति के लोगों के लिए दलित शब्दावली के इस्तेमाल पर रोक लगाने का आदेश जारी किया है।

सभी राज्य सरकारें, केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासकों से कहा गया है कि अनुसूचित जाति के लोगों का उल्लेख करने के लिए सिर्फ उनकी जाति का जिक्र किया जाए।

केंद्र के इस निर्देश के बाद केंद्रीय विद्यालय संगठन ने भी दलित शब्द का इस्तेमाल न करने का निर्देश जारी कर दिया है। अन्य विभागों में भी ऐसे निर्देश जारी किए जा रहे हैं।

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