मेरी ‘टट्टी’ खाकर ठीक नहीं किया…

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कहते हैं कि अपेक्षाएं हमेशा दुख ही देती हैं पर आज लगा की यह भी गलत है। मैंने तो बिना किसी अपेक्षा के एक नाव की सवारी की थी। साहसी की तरह, न डर, न खौफ, न कोई परवाह, खुलकर अपना कुर्बान करके। न तो कुछ लिया न तो चाहत की, बल्कि दिया। खुलकर कहता हूं… दिया..दिया और दिया। हां, जताया कभी नहीं। बावजूद इसके मेरे नाम से लूट लिया। …मेरी ही टट्टी खा गए। गलत किया, जो भी किया ठीक नहीं किया। महज 15 हजार के लिए एक ईमानदार के नाम पर बेईमानी का चरस पी गए। ...अभी भी मैं लिहाज करता हूं।

सम्मान कायम रखिए…इसलिए मोहब्बत से कहता हूं कि मेरी टट्टी मुझको चाहिए। मैंने कभी चरण वंदना के दम पर कुछ हासिल नहीं किया। …किसी के बाप की दया, रहम और मदद का मैं गुनहगार भी नहीं। इसलिए मुझपर कोई भी प्रभाव, दबाव नहीं चलेगा। दुनिया लूट लेते मैं कुछ नहीं कहता पर मुझे देने की बजाय मेरे नाम पर ही लूट लिया गलत किया। मेरे नाम पर भ्रष्टाचार हो मुझे बर्दाश्त नहीं, किसी भी कीमत पर नहीं। हर कीमत पर मैं लड़ूंगा…चाहे कुछ हो जाए। अभी बाहर जा रहा हूं। दो दिन बाद राजधानी वापसी होगी।

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