तीन सौ परिवारों की रोजी रोटी का सवाल फिर भी मद मस्त हैं अधिकारी

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शाहजहांपुर। उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में स्थित डाकघर के लगभग 300 बचत अभिकर्ताओं के लिए रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है। इसके लिए अधिकारियों को जिम्मेदार बताया जा रहा है।

क्या है पूरा मामला
बताया जा रहा है कि जिला बचत अधिकारी शाहजहांपुर के पद पर तैनात परशुराम 3 सालों से एक ही जगह तैनात हैं। तीन वर्षों से जमें अपर सहायक निदेशक बचत राजेश कपूर की भूमिका भी इसमें संदिग्ध बताई जा रही है। इन दोनों अधिकारियों पर न तो किसी जिम्मेदार की नजर ही पड़ रही है न सरकार की और न तो शाहजहांपुर से सदर विधायक और योगी सरकार में मंत्री सुरेश खन्ना जी की। इतना ही नहीं जिला बचत अधिकारी परशुराम की तो जांच भी चल रही है लेकिन उसके बावजूद वहां तैनात रहने के दौरान जांच को दफन करने के लिए आज भी कुर्सी पर आसीन है, जबकि जिस अधिकारी पर जांच चलती है तो उसको वहां से हटा दिया जाता है इसके अलावा एक सरकार का यह भी शासनादेश है कि जो अधिकारी जहां का निवासी है उसकी तैनाती उस जिले में हरगिज नहीं हो सकती है। बावजूद इसके परशुराम पिछले तीन सालों से शाहजहांपुर में ही तैनात हैं जबकि यह उनका होम टाउन है। अब सवाल यह उठता है कि शासन प्रशासन व सदर विधायक सुरेश खन्ना जी व जनपद के उच्चाधिकारी ऐसे महान लोगों पर अपनी मेहरबानी क्यों बरपा रहें।

कहीं ऐसा तो नहीं कि दाल में कुछ काला हो ? शाहजहांपुर जनपद में अभिकर्ताओं की रोजी रोटी बंद होने में ये दोनों अधिकारी सबसे बड़े पितामह है इन दोनों अफसरों ने लगभग तीन सौ महिला बचत अभिकर्ताओं के खातों पर रोक लगा दी बचत कार्यालय से महिला अभिकर्ताओं को मिलने वाले एल एल आर- फाइव कार्ड न मिलने के कारण महिला अभिकर्ता रूपए नहीं जमा कर पा रही है जिसके कारण महिला अभिकर्ताओं की तो रोजी रोटी बंद है वहीं डाकघर को भी हर माह लगभग १० लाख रुपए का राजस्व नुकसान हो रहा है लेकिन बड़े शर्म की बात है कि सरकार को चूना लगाने वाले ऐसे अफसरों पर न कोई जांच ना कोई कार्रवाई और उसी जनपद के निवासी फिर वहीं के विभाग में तैनात अब देखना यह है कि उत्तर प्रदेश के बचत निदेशक संजीव मित्तल जी का इन भ्रष्ट अधिकारियों के प्रति कैसा रवैया अपनाया जाता है।

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