राम मंदिर और मॉब लिंचिंग समेत इन 10 बड़े मुद्दों पर क्या बोले मोहन भागवत

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New Delhi. राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवन ने देश के 10 बड़े मुद्दों पर अपनी राय खुलकर दी। दिल्ली में हो रहे तीन दिवसीय ‘भविष्य का भारत-राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का दृष्टिकोण’ कार्यक्रम के अंतिम दिन मोहन भागवत ने 25 विषयों से संबंधित पूछे गए 215 सवालों में बहुत सारे जवाब दिए। आईए जानते 10 प्रमुख मुद्दों पर उनकी राय।

1. क्या कहा Hinduism पर
हिंदुत्व, Hinduness, Hinduism गलत शब्द हैं, इस्म (ism) एक बंद चीज मानी जाती है, यह कोई इस्म नहीं है। भागवत ने कहा कि सत्य की अनवरत खोज का नाम ही हिंदुत्व है। ये निरंतर चलने वाली एक प्रक्रिया है। हिंदुत्व सबके तालमेल का आधार हो सकता है। भारत में रहने वाले लोग हिंदू ही है। भागवत ने कहा कि गांधी जी ने कहा था कि सत्य की अनवरत खोज का नाम हिंदुत्व है, एस राधाकृष्णन का कथन है कि हिंदुत्व एक सतत चलने वाली प्रक्रिया है।

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2. गोरक्षा हिंसा और मॉब लिंचिंग पर क्या कहा

मोदी सरकार बनने के बाद मॉब लिंचिंग भी एक मुद्दा बन गया है। संघ प्रमुख भागवत ने कहा कि गोरक्षा में जुड़े लोगों को मॉब लिंचिंग से जोड़ना ठीक नहीं है। किसी प्रश्न पर हिंसा करना अपराध है और उस पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए परंतु गाय परंपरागत श्रद्धा का विषय है। अपने देश में अर्थायाम का आधार गाय बन सकती है। गौरक्षा होनी चाहिए।

3. धारा 370 और अनुच्छेद 35 ए

धारा 370 और अनुच्छेद 35 ए पर हमारे विचार सर्वोपरि हैं। हम उनको नहीं मानते, यानी वो दोनों नहीं रहना चाहिए, ये हमारा मत हैै।

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4. राम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर
देश के बहुतसंख्यक लोगों के लिए राम भगवान हैं। लोग उन्हें इमाम ए हिंद मानते हैं। भगवान राम क विशाल मंदिर बनना चाहिए। बहरहाल राम मंदिर पर अध्यादेश का मामला सरकार के पास है और आयोजन का मामला रामजन्म भूमि मुक्ति संघर्ष समिति के पास है और दोनों में मैं नहीं हूं। आंदोलन में क्या करना है, इसे उच्चाधिकार समिति को तय करना है। अगर वह सलाह मांगेगी तो मैं बताऊंगा।

5. संस्कृत का महत्व
नई शिक्षा नीति बनानी चाहिए। नई शिक्षा नीति आने वाली है, उसमें हमारी परंपरा समाहित होगी। भागवत ने कहा कि ग्रंथों का अध्ययन शिक्षा में अनिवार्य है, ऐसा संघ का मत है।

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6. भाषा से शत्रुता नहीं

भागवत भाषा को लेकर कहा कि अंग्रेजी हमारे मन में है, नीति नियामक में नहीं। मातृभाषाओं को सम्मान देना शुरू करें। अपनी भाषा का पूरा ज्ञान हो। किसी भाषा से शत्रुता नहीं करनी चाहिए। अंग्रेजी हटाओ नहीं, यथास्थान रखो। देश की उन्नति के नाते हमारी राष्ट्रभाषा को स्थान मिले, यह जरूरी है।

7. अतंरजातीय विवाह का समर्थन

हम अंतरजातीय विवाह का समर्थन करते हैं। मानव-मानव में भेद नहीं करना चाहिए। भारत में संघ के स्वयंसेवकों ने सबसे ज्यादा अंतरजातीय विवाह किए हैं। समाज को अभेद दृष्टि से देखना जरूरी है। इससे हिंदू समाज नहीं बंटेगा। इसलिए हम सभी हिंदुओं को संगठित करने का प्रयास कर रहे हैं।

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8. आरक्षण का समर्थन

भागवत ने कहा कि सामाजिक विषमता को दूर करने के लिए संविधान में जहां जितना आरक्षण दिया गया है, संघ का उसका समर्थन रहेगा। आरक्षण कब तक चलेगा इसका निर्णय वही करेंगे जिनके लिए आरक्षण तय किया गया है। सामाजिक विषमता हटाकर सबके लिए बराबरी हो इसलिए संविधान में प्रावधान किया गया है।

9. सरसंघचालक का चुनाव

मोहन भागवत ने कहा, ‘संघ में सरसंघचालक का चुनाव नहीं होता। मैं कब तक रहूंगा यह मैं तय करूंगा। मेरे बाद सरसंघचालक कौन होगा यह भी मैं तय करुंगा, लेकिन संघ के सारे अधिकार संघ के सह कार्यवाह के पास होते हैं और जो सह कार्यवाह कहेंगे वो मुझे करना अनिवार्य हैं। 3 साल के अंतराल पर सह कार्यवाह का चुनाव होता है।

मोहन भागवत ने कहा – मुसलमानों के बिना हिंदुत्व नहीं, अन्य दलों के लिए कहा…

10. समलैंगिकता

समाज में कुछ लोगों में (समलैंगिकता) हैं। ऐसे लोग समाज के अंदर ही हैं इसलिए उनकी व्यवस्था समाज को करनी चाहिए। मुद्दा बनाकर हो हल्ला करने से फायदा नहींं। समाज बहुत बदल चुका है इसलिए समाज स्वस्थ रहे ताकि वे (समलैंगिक) अलग-थलग पड़कर गर्त में न गिर जाएं।

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