सीतापुर: लुट रहा पीएम मोदी का सपना, डीएम साहिबा के पास नहीं है समय

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि न खाऊंगा न खाने दूंगा। वह खुद तो नहीं खा रहे, लेकिन किसी को खाने से रोक नहीं पा रहे। हम बात कर रहे हैं पीएम आवास में हो रहे बंदरबांट की। अधिकारियों की सरपस्ती में ग्राम प्रधान, सेक्रेटरी और बीडीओ की तिकड़ी ने इस योजना का गला घोंट दिया है। गरीबों को आसियाना देने का सपना प्रशासनिक अमले की भ्रष्टता की भेंट चढ़ गया है। राजधानी लखनऊ ही नहीं यूपी के तमाम ऐसे जिले हैं जहां यह तिकड़ी लूट रही है। इतना ही नहीं जिले की डीएम साहिबा भी मौन हैं और संबंधित अधिकारी भी कान में तेल डालकर सो चुके हैं।

क्या कहा डीएम सीतापुर ने
पीएम आवास में हो रही धांधली को लेकर कई बार परियोजना निदेशक से बात करने की कोशिश की गई लेकिन उनका फोन नहीं उठा। वहीं जब डीएम से बात की गई तो उन्होंने भी इसमें इंट्रेस्ट लेना नहीं चाहा। सोमवार और मंगलवार को लगातार कई बार उनसे बात करने की कोशिश की गई,लेकिन वह फोन पर उपलब्ध नहीं हुईं। वहीं डीएम के सीयूजी नंबर पर मंगलवार को फिर फोन किया गया तो उनके स्टोनों ने बताया कि मैम का टेलीफोन से वर्जन नहीं देती। आप आकर मैम से मिल सकते हैं। देख लेते हैं मैम से बात करके फिर आपको बताते हैं आप 5 बजे के बाद एक बार फिर काल कर लें। हालांकि डीएम के सीयूजी नंबर पर मैसेज किया गया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी।

कहां हैं ये टीमें
प्रधानमंत्री ने खुद को देश का चैकीदार कहा था। अब सवाल यह उठता है कि उनकी ही महत्वाकांक्षी योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रही है। हालांकि योजना में भ्रष्टाचार न हो इसके लिए कई नियम और टीमें हैं। योजना की इलेक्ट्रानिक तरीके से बल्कि सामुदायिक भागीदारी (सामाजिक लेखा-परीक्षा), संसद सदस्यों (दिशा-समिति),केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारियों, राष्ट्रीय स्तरीय निगरानी कमेटी के माध्यम से भी निगरानी की व्यवस्था बनाई गई है, लेकिन यह जमीन पर उतरती नहीं दिख रहीं। सख्त नियमावली कागजों पर ही दम तोड़ रही है यही कारण है कि हर कदम पर इस योजना में भ्रष्टाचार जड़े जमा चुका है।

भ्रष्टता में फसी मोदी की योजना
बाॅलीवुड में एक फिल्म आई थी ‘थैंक यू’। इसमें एक बहुत ही पाॅपुलर साॅन्ग था ‘रजिया गुंडो में फस गई’। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना ‘प्रधानमंत्री आवास’ का हाल भी कुछ ऐसा ही है। पीएम का सपना है कि देश के हर गरीब के पास 2022 तक अपना घर हो, लेकिन प्रशासनिक अमला पीएम मोदी के इस सपने को दीमक की तरह खा जाने पर अमादा है। राजधानी लखनऊ ही नहीं प्रदेश के कई जिलों में इस योजना को लूटा जा रहा है। राजधानी से लगे जिला सीतापुर में सिधौली ब्लाक में स्थित जजौर पंचायत में भी पीएम आवास में अनियमितता हो रही है। ग्राम प्रधान और सेके्रटरी ने मिलकर युवक मंगल दल की सरकारी जमीन पर अधिकारियों को चुनौती देते हुए अवैध तरीके से प्रधानमंत्री आवास बनवा दिए। इस संबंध में जब एंटी भू माफिया सेल पर गांव के एक सजग नागरिक द्वारा शिकायत की गई तो इसकी जांच शुरू हुई और लेखपाल ने जांच रिपोर्ट में बताया कि गाटा संख्या 445/0.379 हे. जमीन सरकारी है जो कि युवक मंगल दल के नाम है। उक्त गाटा संख्या में अवैध तरीके से, बिना आवंटन के ग्राम प्रधान और सेके्रटरी ने आवास बनवा दिए हैं, अब देखना यह है कि जिले की डीएम इस पर क्या एक्शन लेती हैं।

इतना ही नहीं यहां जो पात्र हैं उन्हें इस योजना का लाभ नहीं मिल रहा जबकि जिनके मकान पहले से बने हैं उन्हेें फिर से आवास दिए गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम प्रधान आनंद कुमार अधिकारियों के संरक्षण, सेक्रेटरी और बीडीओे की मदद से अपने करीबियों को रेवड़ी की तरह मकान बांट रहे हैं। इसमें पात्र कम अपात्रों की संख्या अधिक है। आरोप है कि कई ऐसे लोगों को आवास दिया गया है जो कि 20 साल से भी गांव नहीं आए। किसी के पास तो 20 बीघा जमीन है फिर भी उन्हें गरीब बताकर आवास दे दिया गया। कई ऐसे लोग भी हैं जिनके पास पहले से घर था और पीएम आवास भी मिल गया तो उसी पुराने घर को पुताकर पीएम आवास बताकर पैसे हड़प लिए गए। इस खेल में नीचे से लेकर ऊपर तक संलिप्तता की बात सामने आ रही है। हद तो तब हो गई जब ग्रामीणों ने इसकी शिकायत जन सुनवाई पोर्टल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर की। बदले में विकास भवन से जांच के लिए आदेश हुआ, लेकिन जांच भी उन्हीं लोगोें को दी गई जो इस भ्रष्टाचार में भागीदार थे। उसी सेके्रटरी (ग्राम सचिव) ने सभी शिकायतोें की जांच की जो कि इसमें संलिप्त है। अब सवाल यह उठता है कि फिर न्याय कैसे होगा? आपको बता दें कि ग्राम सभा द्वारा लाभार्थियों का निर्धारण और चयन मकानों की कमी और सामाजिक आर्थिक जाति जनगणना (एसईसीसी) 2011 के आकड़ों के आधार पर किया गया है। उस समय जिनके कच्चे मकान थे, आज उसमें से बहुत लोगों ने अपने मकान पक्के बनवा लिए। लगभग सात साल पहले जनगणना हुई और आवास अब मिल रहे हैं। इस बीच जो लिस्ट बनी है उसमें सभी के नाम हैं लेकिन उसमें से जिनके मकान बन गए हैं। उन्हें लिस्ट से हटाने और जो नए पात्र हो गए हैं उनके नाम जोड़ने के लिए खुली बैठक कर ग्राम सभा की मदद से सेके्रटरी रिपोर्ट बनाकर उच्च अधिकारियों को भेजते हैं।

ऐसा नियम है, लेकिन होता नहीं। इसमें जमकर अनियमितता होती है। उनके नाम भेजे जाते हैं जो जेब गरम कर सके। इसमें प्रधान, सेके्रटरी और बीडीओ बंदरबांट करता है। दृष्टांत ने जब जजौर पंचायत में पीएम आवास का हाल जाना तो सामने आई डर्टी पिक्चर। गांव में ही रहने वाले शकील की पत्नी जहीरूननिशा का आवास लखनऊ में बना है। शकील के एक इंटर काॅलेज है, क्लीनिक है, जनरेटर सेट है तथा समर सेबल पम्प है। फिर भी इनको प्रधानमंत्री आवास दिया गया जिसकी आइडी यूपी 2457616 है। हद तो तब हो गई जब इनकी आईडी में लगी फोटो में ही इनका जनरेटर आ गया और अधिकारियों को दिखा नहीं। गांव वालों ने जब जन सुनवाई पोर्टल पर इसकी शिकायत की तो तत्कालीन ग्राम सचिव विवेक अवस्थी ने जांच करके शिकायत को ही फर्जी बताकर रिपोर्ट बीडियो को भेज दी। इसमें लिखा कि लाभार्थी अल्पसंख्यक विरादरी की हैं इनका मकान कच्चा था जांच में ये पात्र पाई गईं इसलिए इन्हें आवास दिया गया।

हीरालाल पुत्र सरजू का लखनऊ में मकान बना है वह 25 सालों से लखनऊ में अपने परिवार केे साथ रहते हैं। इनका गांव में आना जाना भी कम है। इनके नाम से राशनकार्ड बना है जिस पर राशन भी कोई और ले रहा है। बावजूद इसके इन्हें गांव में भी प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दे दिया गया और जांच रिपोर्ट में सेके्रटरी ने इन्हें भी क्लीन चिट दे दी। रामकली के पति का नाम है त्रिलोकी जो कि रघुवीर के लड़के हैं। इनकी पत्नी के नाम से 2008 में मकान बन चुका है। रामकली का एक और नाम मीना भी है। इनके चार लड़के हैं चारों लखनऊ में रहते हैं। रामकली और पति का नाम गलत दिखाकर इन्हें भी आवास दिया गया, जिसकी आईडी यूपी 2321511 है। वहीं सेक्रेटरी ने इन्हें जांच में क्लीन चिट दे दी। गांव के ही सुनील को भी आवास दिया गया है जबकि इनके घर में चक्की लगी है, इनके पास इंजन भी है। सुंदरी को भी यूपी 1104607 आईडी से आवास दिया गया जबकि इनका एक लड़का लखनऊ में हाइवे हाॅस्पिटल में डाॅक्टर है। डालीगंज में इनका मकान बना है। ये अपने परिवार के साथ वहीं रहते हैं। घर में एक अल्टो कार और एक और लग्जरी गाड़ी है। सुंदरी का मकान भी 2008 में बना था। फिर से इन्हें आवास दिया गया। रामकेशन का 2008 में मकान बना था। इनका पूरा मकान पक्का बना था ये प्रिंटिंग पे्रस का काम करते हैं। इंटौजा में इनकी दुकान है। प्रधान के चहेते हैं।

इसलिए यूपी 2031266 आईडी से इन्हें भी मकान दिया गया। बाबूलाल की कोठी गांव के किनारे ही रोड पर बनी है जिसमें 11 दुकानें हैं। फिर भी उन्हें आवास दे दिया गया जिसकी आईडी यूपी 2100534 है। कैलाश दिल्ली में रहते हैं। पांच साल पहले इनका मकान बन गया था। लेकिन उसी आवास को पीएम आवास बताकर प्रधान और सेक्रेटरी ने यूपी 2139174 आईडी से आवास का पैसा ले लिया। मालिक का पहले से ही पक्का मकान बना था, लेकिन यूपी 2158864 आईडी बनाकर इन्हें भी आवास दे दिया गया। बाबूलाल के भाई छोटेलाल के भी मकान था, लेकिन उन्हें भी पीएम आवास दिया गया इसकी शिकायत की गई तो उनके बड़े भाई ने बताया कि इन्हें संपत्ति से बेदखल कर दिया गया है। चेतराम का पकका घर पहले से बना था, लेकिन बने हुए घर पर ही पीएम आवास लिख कर यूपी 2258308 आईडी बनाकर पैसा निकाल लिया गया। संकटा प्रसाद का एक लड़का है कौशल किशोर इनका मकान लखनऊ में है। 2017 में संकटा प्रसाद के नाम से आवास बना। 2018 में उनके बेटे किशोर के नाम से बना दिया गया इसकी आईडी यूपी 1077518 है।

शिकायत के बाद सेक्रेटरी ने इन्हें भी क्लीन चिट देकर खंड विकास अधिकारी को रिपोर्ट सौंप दी। इसमें लिखा है कि लाभार्थी के पास मात्र 9 बीघा जमीन है वह गरीब है इसलिए उसे आवास दिया गया। इस रिपोर्ट को डीएम के पास भी प्रेषित किया तो उन्होंने भी ओके कर दिया और शिकायत को निस्तारित कर दिया गया। अब सवाल यह है कि 9 बीघा जमीन का मालिक भी गरीब है। शीतला प्रसाद का भी मकान पूर्व में बना था फिर भी सेक्रेटरी और प्रधान की मिलीभगत के चलते यूपी 2323335 आईडी बनाकर इन्हें भी आवास दे दिया गया। रमेश गढ़ी लखनऊ में रहते हैं। इनके पास खुद की टैक्सी है। इनका भी मकान 4 साल पहले ही बन चुका था बावजूद इसके इन्हें भी मकान दे दिया गया। प्रभु दयाल के पास 20 बीघा खेती है। वह भी एक ही पास। इससे पहले इंदिरा आवास बना था। फिर से पीएम आवास बनवा दिया गया। ग्रामीणों ने आरोप लगाए हैं कि जो पकड़ वाले लोग हैं उनके आवास आए जो गरीब हैं उन्हें आवास नहीं मिले। इसकी कड़ी ग्राम प्रधान से लेकर सचिवालय में तैनात एक अर्दली तक जुड़ी हैं। दरअसल सचिवालय में अर्दली रामशंकर गुप्ता पुत्र भगवानदीन को आवास दिए गए, क्योंकि उनका सोर्स है। जबकि गांव की ही मूला, हनुमान पुत्र कल्लू व मनोज पुत्र दयाशंकर जैसे तमाम पात्रों को इसमें दरकिनार कर दिया गया है। आरोप है कि इन्होंने पैसे नहीं दिए इसलिए इन्हें अपात्र बताकर इनके आवास रोक दिए गए।

अब सवाल यह भी है कि 20 बीघा जमीन वाला व्यक्ति क्या गरीब है? क्या उसे भी प्रधानमंत्री आवास की जरूरत है? लीपापोती यहीं खत्म नहीं हुई जजौर ग्राम प्रधान आनंद कुमार ने सेके्रटरी से मिलकर गांव के पास स्थिति पंचायत की जमीन पर बाहर से आए नट विरादरी के लोगों को टिकाकर उनके भी आवास बनवा दिए, जबकि गांव के लोगों का कहना है कि यह जमीन पंचायत की है जो कि युवक मंगल दल के नाम है। जिसे बच्चों के खेल मैदान हेतु दिया गया था, इसकी पुष्टि खुद लेखपाल ने अपनी रिपोर्ट में कर दी है। गांव के लोगों ने बताया कि यह जमीन तकरीबन 20 से 25 बीघा है। इस पर 10 पीएम आवास बन चुके हैं। साथ ही 10 शौचालय भी दिए जा चुके हैं। गांव में रहने वाले लोगों का कहना है कि वर्तमान प्रधान ने अपने वोट बैंक के लिए ऐसा किया है। ये नट पहले यहां नहीं रहते थे ये सभी साल 2013 में बाहर से आए। उस वक्त इनके 4 से 6 परिवार थे जो कि आज बढ़कर 24 से ज्यादा हो गए हैं। ये लोग पहले झोपड़ी बनाकर रहते थे। धीरे धीरे फर्जी तरीके से इनके वोटर लिस्ट में नाम दर्ज करवाए गए और फिर इन्हें राशन कार्ड भी दे दिया गया। गांव के लोगों ने बताया कि इन्हें सरकारी जमीन पर प्रधान और सेक्रेटरी की कृपा से वोट बैंक के चक्कर में बसा दिया गया। जबकि गांव में कई और अन्य गरीब हैं जिन्हें आवास नहीं दिया गया। वोटर लिस्ट मेें इनको गजोधरपुर में रहना दिखाया गया है जबकि ये रहते हैं वहां से एक किमी दूर युवक मंगल दल की जमीन पर। इतना ही नहीं इन नटों को प्राथमिक विद्यालय जजौर की सरकारी जमीन भी फ्री में दे दी गई।

गांव वालों ने बताया कि पहले यह जमीन गांव के ही लोगोें को निश्चित राशि पर नीलाम की जाती थी। इससे जो पैसा मिलता था उससे स्कूल का मेंटीनेंस होता था। लेकिन आज ग्राम प्रधान ने वोटों की राजनीति के चलते ग्राम सभा की जमीन पर जबरन कब्जा करवाकर सेक्रेटरी और बीडीओ की मदद से यहां पीएम आवास में खेल शुरू कर दिया। कुछ ऐसीे ही तस्वीर लगभग पूरे प्रदेश की है। हर जगह ऐसी ही अनियमितता हो रही हैं। आपको बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सपना है कि 2022 तक देश के हर परिवार के पास खुद का मकान हो। अपनी जन सभाओं के दौरान वह इस संकल्प को बार बार दोहराते रहे हैं। यह योजना देश की सभी 29 राज्यों और 7 केंद्र शासित प्रदेशों के 4,041 शहरों और कस्बों में चल रही है। इस योजना का शुभारंभ 25 जून 2015 को हुआ। योजना का उद्देश्य 2022 तक सभी को मकान उपलब्ध कराने की सरकार की प्रतिबद्धता को ध्यान में रखते हुए इंदिरा आवास योजना को 1 अप्रैल 2016 से प्रधानमंत्री आवास योजना में पुनर्गठित कर दिया गया है।

इसमें तीन फेज बनाए गए हैं जिसमें पहला फेज अप्रैल 2015 को शुरू किया गया था जो मार्च 2017 में समाप्त हो गया है इसके अंतर्गत 100 से भी अधिक शहरों में घरों का निर्माण कराया गया है। दूसरा फेज अप्रैल 2017 से शुरू हुआ है जो मार्च 2019 में पूरा होगा इसमें सरकार ने 200 से ज्यादा शहरों में मकान बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। वहीं तीसरा फेज अप्रैल 2019 में शुरू किया जाएगा और मार्च 2022 में समाप्त किया जाएगा जिसमे बाकी बचे लक्ष्य को पूरा किया जाएगा। इस योजना के तहत मिलने वाली राशि और सब्सिडी राशि डायरेक्ट उम्मीदवार के बैंक खाते में आती है जो कि आधार कार्ड से लिंक होगा, जिससे कि उसे इसका सम्पूर्ण फायदा मिल सके। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनने वाले पक्के मकान 25 स्क्वायर मीटर (लगभग 270 स्क्वायर फिट) के होंगे जो कि पहले से बढ़ा दिए गए हैं पहले इनका आकार 20 स्क्वायर मीटर (लगभग 215 स्कार फीट) तय किया गया था।

साल 2016 से 18 तक तीन सालों में एक करोड़ परिवारों को इस योजना का लाभ दिया जाएगा। मैदानी क्षेत्रों में इस योजना में 70,000 रूपए की जगह अब 1 लाख 20 हजार दिए जा रहे हैं वहीं पर्वतीय राज्यों, दुर्गम क्षेत्रों आईएपी जिलों में 75 हजार की मिलने वाली राशि को अब बढ़ा कर 1 लाख 30 हजार कर दिया गया है। इस योजना में खर्चे का वहन केंद्र और राज्य सरकार 60ः40 के रेसियो से कर रही हैं। वहीं पूर्वोत्तर व हिमालय वाले राज्यों के लिए 90ः10 के रेसियो से वहन कर रही हैं। साल 2011 में हुई जनगणना के अनुसार इस योजना का लाभ दिया जा रहा है। इसकी ग्राम सभा द्वारा जांच की जाती है। इस योजना का लाभ ईडब्ल्यूएस श्रेणी एलआईजी के परिवारों को ही दिया जा रहा है। आपको बता दें कि कोई परिवार ईडब्ल्यूएस श्रेणी में तभी आता है जब उसकी वार्षिक आय 3 लाख से ज्यादा न हो।

वहीं एलआईजी में वह तब आएगा जब उसकी वार्षिक आय 3 लाख से 6 लाख के बीच में होगी। अगर परिवार के किसी भी सदस्य के नाम पक्का मकान पहले से है तो वह इस योजना का लाभ नहीं ले सकता। बावजूद इसके गरीबों के लिए बनी इस योजना का लाभ ज्यादातर उन अपात्रों को मिल रहा है जिनके पहले से ही मकान बने हैं और प्रधान के करीबी हैं। इस बंदरबांट में ग्राम प्रधान, सेक्रटरी और बीडीओ की तिकड़ी शामिल है जिन्हें उच्च अधिकारियों का संरक्षण मिला है। अब देखना यह है कि देश के चैकीदार अपने ही सपनों में लगे भ्रष्टाचारी घुन को कैसे साफ करेंगे? जिलों में बैठे जिम्मेदार कब अपनी जिम्मेदारी समझेंगे। देश का गरीब, किसान, मजदूरी टकटकी लगाए बैठा है कि अब अच्छे दिन आएंगे। भ्रष्टाचार से मुक्ति मिलेगी। उन्हें उनके सपनों का घर मिलेगा, जिस पर उनका अधिकार है।

लेखपाल ने क्या कहा
लेखपाल सच्चिदानंद त्रिवेदी ने कहा कि कुछ लोगों ने नवयुवक मंगल दल की सरकारी जमीन पर अवैध तरीके से मकान बनाए हैं। आईजीआरएस पर इसकी शिकायत आई थी, जिस पर मैंने रिपोर्ट लगाई है। बिना प्रधान और सेक्रटरी के सामंजस्य के यह संभव नहीं है। लोक संपत्ति क्षति अधिनियम के तहत जो कार्यवाही होनी चाहिए वह की जा रही है। दो दिन के अंदर इस पर कार्यवाही हो जाएगी। ये कार्यवाही जिन लोगों ने मकान बनाया है उनके खिलाफ होगी। इसके बाद देखा जाएगा की वाद किस योग्य है। हमने राजस्व की धारा से कार्यवाही करेंगे अब देखा यह जाएगा कि क्या प्रशासनिक चार्ज बन रहा है। मामला सरकारी कालोनी का है सेक्रेटरी प्रधान को सुनिश्चित करके कालोनियां बनवानी थी। इस कार्यवाही के बाद यह प्रूफ हो जाएगा कि प्रधान और सेक्रेटरी ने मिलकर गलत तरीके से आवास बनवाए हैं। तो उसके बाद जो कार्यवाही बनती है वह उन पर होगी। इसमें कोई आवंटन नहीं हुआ है। यह सरकारी जमीन है मनमाने तरीके से इस पर 10 कालोनियां बनवाई गईं हैं। जब ये कालोनियां बन रही थीं तो हमने तत्कालीन अधिकारियों को मौखिक रूप से सूचना दे दी थी साथ ही उसी समय 100 नंबर पर फोन करके इसे रुकवा दिया था, लेकिन प्रधान द्वारा रातों रात बाद में कालोनियों को बनवा दिया। पीएम आवास पंचायत स्तर से ग्राम सचिव और प्रधान मिलकर बनवाते हैं। जो जमीन होती है उसे राजस्व विभाग आवंटित करता है। या फिर जमीन लाभार्थी के नाम हो या उसकी पैतृक जमीन हो। कानून को दरकिनार करके प्रधान और सेक्रटरी ने कालोनियां बनवाई हैं।

ग्राम प्रधान ने क्या कहा
ये नट विरादरी के लोग हैं जहां उनको जगह मिलती है बस जाते हैं। हमारी पंचायत में भी जगह पड़ी थी ये लोग आए और बस गए। पंचायत की जमीन है कोई भी कब्जा कर ले इसमें मैं क्या कर सकता हूं। मैं किसी को भी हटाऊंगा नहीं। वैसे भी इसमें कहीं मेरी कोई लिखा पढ़ी नहीं है। सूची में नाम होने के चलते उन्हें प्रधानमंत्री आवास दिए गए हैं। जिस जमीन पर नट बसे हैं वह पंचायत की है, जो खेलकूद का मैदान है। नट विरादरी की कहीं कोई जमीन नहीं होती। किसी को बसाया जाता है उजाड़ा नहीं जाता। वो पहले से रह रहे थे। इसमें मैंने कोई लिखा पढ़ी नहीं की। इसमें सर्वे हुआ था जिसके तहत उन्हें मकान दिए गए हैं। अगर आपको कोई बात करनी भी है तो इसके लिए सेक्रेटरी,वीडियो और परियोजना निदेशक से बात करिए। हवा में किसी को मकान नहीं मिलता सूची में नाम होने पर ही मकान दिया जाता है। ग्राम प्रधान ने अपने घर में ही दो शौचालय बनवा लिए इस सवाल पर प्रधान ने कहा कि हर प्रधान को अपने घर में शौचालय पहले ही बनवा लेना चाहिए। अगर प्रधान के घर में शौचालय नहीं होगा तो फिर लोगों के घर में कैसे होगा। जब प्रधान के घर पर शौचालय होगा तभी तो आम पब्लिक प्रेरित होगी।

क्या कहा सीडीओ सीतापुर ने
सीडीओ सीतापुर संदीप कुमार ने बताया कि अगर आईजीआरएस पर शिकायत होती है तो उसे हम लोग बीडीओ को भेजते हैं। बीडियो को खुद जांच करनी होती है। जांच अधिकारी वीडीयो होता है, लेकिन इस मामले में बीडीओ ने सेके्रटरी को जांच के लिए शिकायत ट्रांसफर कर दी यह उनको नहीं करना चाहिए था। यह बीडीयो की गलती है। पीएम आवास में छूटे हुए पात्रों का चयन सेके्रटरी करता है ग्रामसभा की खुली बैठक में भी चयन होता है। एडीओ लेबर के अधिकारी उसकी समीक्षा करते हैं। अगर कोई अनियमितता हुई है तो इसकी जिला लेबल के अधिकारी से जांच करवाकर जो भी कार्यवाही होगी की जाएगी। पात्रता के मानक के अनुसार पात्र का चयन होना चाहिए। जमीन लाभार्थी के नाम होनी चाहिए पंचायती जमीन पर आवास नहीं बनवा सकते। अगर ऐसा हुआ है इसमें सेके्रटरी दोषी है अगर ग्रामसभा से प्रस्ताव बनाकर इसको ऊपर भेजा गया है तो इसमें प्रधान भी दोषी है। 2011 में एक स्थाई पात्रता सूची बनी थी इसमें जिनका नाम था उनके नाम को फिर से देखकर कि यह वर्तमान में पात्र हैं या नहीं आवास देना था जो छूट गया है उसे खुली बैठक में प्रस्ताव पारित करके आवास देना था। घर घर जाके सेक्रटरी को जांच करनी थी। मुख्यमंत्री आवास के लिए ग्राम सभा में खुली बैठक हुई थी। जहां जहां पर जिसका जिसका रोल है ये जांच डीएम साहेब के द्वारा पंचायत राज अधिनियम में धारा 95/6 है, इसके तहत जो दोषी होगा कार्यवाही होगी। ऐसे ही एक मामले में मेरे द्वारा डीएम आॅफिस में फाइल भेजी थी जिस पर एफआईआर कराने की संस्तुति मिल गई है जल्द ही उन पर एफआईआर होगी। इस मामले में अगर प्रधान और सेक्रेटर दोषी पाए गए तो उन पर जांच एफआईआर होगी।

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