भारत में इमरान प्रेम का रस कहां से टपक रहा है, कहीं मिल न जाए शांति पुरस्कार

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पुलवामा हमले के बाद सोशल मीडिया पर वीर रस बरसने लगा था। मुंह से ही पृथ्वी, अग्नि और ब्रम्होस जैसी मिसाइलें पाकिस्तान की ओर छोड़ी जाने लगीं। कुछ लोगों ने तो बिना जाने समझे कुछ राफेल भी पाकिस्तान की ओर भेज दिए। लाजमी भी था, देश ने अपने 40 जवान खोए थे। पूरा हिन्दुस्तान गुस्से में था। कुछ दिन बाद ही एयर ​स्ट्राइक के बाद देशभक्तों के घाव पर थोड़ा मरहम लगा। सेना ने कहा यह स्ट्राइक असैन्य थी। जरूरी भी था क्योंकि हमारा दुश्मन पाकिस्तान नहीं आतंकवाद है। जैश सरकार मसूद अजहर है।

सेना के अधिकारियों ने ब्रीफिंग में कहा कि हमें जैश की गतिविधियों पर इनपुट मिला था। इसलिए हमने स्ट्राइक कर दी। हमे जो टारगेट दिया गया था। हमने उसे पूरा किया। बस इतना था कि मीडिया ने अपने सूत्र चौकन्ने कर दिए। भोर होते ही किसी ने 250 आतंकी गिरा दिए। कोई 150 से 200 पर था तो किसी ने सभी का रिकॉर्ड तोड़ते हुए 400 से 500 आतंकियों को जहन्नुम पहुंचा दिया। मुझे लगता है कुछ तो हक उनका भी था। (पाकिस्तानी मीडिया को इससे ज्यादा अधिकार है आप यूट्यूब पर उस दौरान के वीडियो देखें) देश भर में जय जयकार होने लगी, पाकिस्तान को यह नागवार गुजरा और उसने अपने जहाज भारतीय सीमा की ओर रवाना किए।

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