नवरात्रि स्पेशल: अकाल बोधन की पूरी कहानी, राम ने भेंट कर दी थी अपनी आॅंख

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भस्मासुर डेस्क। भस्मासुर डॉट कॉम आपको मां दुर्गा की कुछ ऐसी कहानी आज आपको बताएगा जिसका जिक्र रामायण में भी नहीं है। आइए जानते हैं मां दुर्गा और राम से जुड़ा एक सच। भगवान राम को जब पता चला कि माता सीता लंका में रावण की कैद में हैं तो वह अपनी सेना समुद्र के दूसरे ओर लेकर पहुंचे। विभीषण ने रावण की शक्तियों के बारे में राम को बताया।

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भगवान राम रावण का वध करने से पहले मां दुर्गा का आशीर्वाद लेना चाहते थे। मां को असमय प्रसन्न करना आसान नहीं था। मां दु्र्गा को पहली बार अश्विन में भगवान राम ने प्रसन्न करने की तैयारी शुरू की जबकि इससे पहले मां की पूजा सिर्फ चैत्र में होती थी।

खुद यजमान बनकर राम ने तैयारियां शुरू की। इस पूजा के लिए उन्हें 108 नीलकमल की जरूरत थी। भगवान ने हनुमान को आदेश दिया। हनुमान 108 नीलकमल लेकर आए लेकिन मां दुर्गा राम की परीक्षा लेना चाहती थीं। इसलिए उन्होंने एक नीलकमल को कम कर दिया। नीलकमल की संख्या कम होने पर सभी विचार करने लगे कि अब पूजा कैसे सम्पन्न होगी।

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इसी दौरान भगवान राम ने नीलकमल जैसी अपनी आॅंखों में एक आॅंख निकाल का मां को भेंट कर दी। इसके बाद मां प्रकट हो गईं। उन्होंने भगवान राम को विजयीभव का आशीर्वाद दिया। इस कहानी का जिक्र रामायण में नहीं मिलता, लेकिन हमारे पुराणों में यह वर्णित है। भगवान राम ने रावण को हराने के लिए पहली बार अश्विन मेंं मां की पूजा की थी इसलिए इसे अकाल बोधन भी कहा गया। अकाल का अर्थ असमय और बोधन यानी आह्वान या पूजन होता है।

भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका और नेपाल में कुल 51 शक्तिपीठ हैं। महाकाल संहिता के अनुसार इनमें 4 आदि शक्तिपीठ हैं, जहां देवी शरीर के प्रमुख अंग गिरे थे। बाकी स्थानों पर अन्य अंग गिरे थे। …अगर आपको यह जानकारी अच्छी लगी हो तो कृपया इसे शेयर करें, धन्यवाद।

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