नगर निगम के मुख्य वित्त लेखाधिकारी को खुला पत्र

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श्रीमान मुख्य वित्त लेखाधिकारी सबसे पहले तो आप एक संवैधानिक पद पर होते हुए भी मनचाहा फोन ही उठाते हैं यह पूर्णतः नियमविरूद्ध है। मैं डाॅ. अजय शुक्ला उ.प्र. सरकार के सूचना विभाग द्वारा राज्य मुख्यालय का एक मान्यता प्राप्त प्रतिनिधि हूॅ। जिस तरह आप नौकरी ज्वाइन करते समय जनता के हित में कार्य करने की शपथ खाते हैं और सरकार से जनता की सेवा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं उसी तरह मैं भी एक पत्रकार होने के नाते किसी भी परेशान व्यक्ति की सहायता करने के लिए प्रतिबद्ध हॅॅू। आप के द्वारा खुलेआम (अब चाहे वह नगर आयुक्त जिनका स्थानान्तरण हो चुका है या अपर नगर आयुक्त या किसी नेता या शासन के अधिकारी के कहने पर ) मनचाहा भुगतान प्रणाली की कार्यशैली अपना रहे हैं। यह आपके पद की गरिमा के अनुरूप सही नहीं है और न ही शासन या विभागीय मंत्री या मुख्यमंत्री या राज्यपाल या प्रधानमंत्री आफिस दिल्ली आपकी इस कार्यशैली को सही ठहरा सकता है। मैं मानता हॅू कि नगर निगम के वित्त अधिकारी यह कुर्सी चलाना आसान नहीं है पर इस कुर्सी पर बैठ कर मनमानी करना भी सही नहीं है। आपसे पहले भी कई अधिकारी और चले गये उन लोगों ने भी इस कुर्सी को चलाया और आगे भी चलती रहेगी। अब बात आप की करते हैं इस समय आप द्वारा कहा जाता है कि पहले नगर निगम की सैलरी बाटकर ही किसी का भुगतान होगा और यह सही भी है कर्मचारी जो कि काम कर रहें हैं सबसे पहले इन्हीं लोगों का हक है। पर इन सब के बीच आपके द्वारा इसी माह ही एक ठेकेदार का 50 लाख का एक मुश्त भुगतान किया गया क्या यह आपकी प्रतिष्ठा और पद के अनुरूप सही कार्य है। आप ने जब से ज्वाइन किया है कई छोटे ठेकेदार एकदम मर से गये हैं कोई अपना घर बेच रहा है तो कोई अपनी पत्नी के गहने यह सब हाय आप को ही लग रही है। आप द्वारा खुलेआम कई बार यह चैलेंच दिया जाता है कि किसी के बाप की औकात नहीं कि आप को पद से हटा सके तो यह प्रश्न तो माननीय मुख्यमंत्री से ही पूछने वाला है कि क्या एक अधिकारी जो अपने मन की कर रहा हो तो उसे वह भी रोकने में सक्षम नहीं क्या। आप प्रतिदिन किसी बड़े के कहने पर रोज प्रतिदिन कोई न कोई भुगतान कर रहे हैं। और यदि कोई आप के खिलाफ बोलता हैं तो आप उसके ब्लेगमैलिंग करना कहते हैं। आप के तो अशोक स्तम्भ लगा है जो भी सोच लें सब सही ही होगा। पर संविधान के चौथे स्तम्भ मीडिया को आप नहीं दबा सकते अगर गलत होगा तो बोला ही जायेगा। अभी भी मौका है आप की नजर में सभी छोटे-बड़े एक होने चाहिए।

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