बेईमानी के खून में कैसे आएगा उबाल

0
90
लखनऊ। जब कोई जिम्मेदार भ्रष्ट तंत्र में हिस्सेदार हो जाए तो फिर उससे ईमानदारी की उम्मीद कैसे की जा सकती है? हम कैसे उस पर विश्वास करें कि वह अपनी कुर्सी का सही उपयोग कर रहा होगा। वह अपने कर्तव्यों का निर्वहन पूरी निष्ठा से कर रहा होगा। अगर यह सब जानकर भी हम उसे कुर्सी से बेदखल नहीं करते तो फिर मतलब साफ है हम खुद हिस्सेदार हैं। हम बात कर रहे हैं राजधानी पुलिस की। इस विभाग में उन्हें भी जिम्मेदारी मिली है जो खुद संदेह के घेरे में है। फिर उनसे ईमानदारी की उम्मीद कैसी! राजधानी के बन्थरा थाने की एक पुलिस चौकी है हरौनी।
हालही में इस चौकी की कमान विनोद कुमार को सौंपी गई है। ये पिछले दो साल से बन्थरा थाने में तैनात थे और अब हरौनी चौकी के प्रभारी बना दिए गए। आपको बता दें कि स्थानीय पुलिसकर्मियों ने बताया कि इनका दो साल पूर्व बन्थरा से स्थानांतरण उन्नाव हुआ था लेकिन रसूख के चलते यह उन्नाव नहीं गए और यहीं जमे रहे। साथ ही अपने रसूख का फायदा लेकर हालही में यह हरौनी चौकी के मालिक बन गए। स्थानीय लोगों के मुताबिक जब साहब को चौकी मिली तो पार्टी भी हुई। चौकी में ही पार्टी में मुर्गा दारू भी जमकर चला। स्थानीय लोगों ने बताया कि जबसे नए साहब आए हैं मुर्गा दारू कटता ही रहता है।
इस संबंध में स्थाजब नीय लोगों से बात की गई तो डर के चलते वह पहले तो साफ मुकर गए फिर बाद में नाम न बताने की शर्त पर एक आदमी ने पूरी कहानी बताई। उसके मुताबिक कभी कदार ऐसा हो जाता है। करीब 12 दिन पहले ये हुआ। जब इन्होंने ज्वाइन किया उसके 3 से 4 दिन बाद पार्टी हुई इसमें शराब कबाब सब था। साहब दारू के पुरान सौखीन हैं।  दो चार आदमियों का इंतजाम था। जब हम गए तो वहां सब बन रहा था। हम किसी काम से गए थे।
एक और आदमी ने बताया कि जो भी एसओ आता है ये साहब उसके सगे बने रहते हैं। अपने रसूख के दम पर जमें हैं किसी ने इनकी अच्छी रिपोर्ट नहीं दी। जैसे ही पोस्ट हुए तो दावत की थी।
loading...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here