बजरंगी भाईजान नहीं बन सकता पाक, मां के साथ की नाइंसाफी

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इस्लामाबाद। पाकिस्तान की एक बच्ची बॉर्डर पार करके हिंदुस्तान में आ जाती है तो हमारे ‘बजरंगी भाईजान’ अपनी जान जोखिम में डालकर उसे बॉर्डर पार करवाते हैं। ये हमारे वतन की दरियादिली और खूबसूरती है। वहीं हिंदुस्तान की एक बूढ़ी मां अपने बेटे (कुलभूषण जाधव) से मिलने पाकिस्तान गई तो मां बेटे के बीच सीसे की दीवार खड़ी कर दी गई। एक हिंदुस्तानी मां अपने बेटे से बात तक नहीं कर पाई। वह उसे छूना तो दूर ठीक से देख तक न पाई। यह एक भद्दा मजाक है। एक मां के साथ। हे पाकिस्तान तालीम की तो आपमें कमी है ही, आपने अपने बाप (भारत) से संस्कार भी नहीं पाए। हमे यह कहते हुए आज बहुत शर्म आ रही है कि आप हमारे बेटे हैं।

पाकिस्तान ने कथित जासूसी के आरोप में मौत की सजा प्राप्त भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव और उनके परिजनों को यहां मानवीय आधार पर सोमवार को विदेश कार्यालय में 40 मिनट तक मुलाकात करने की इजाजत दी। मुलाकात के दौरान जाधव व उनके परिजनों के बीच ग्लास पैनल लगाया गया था और उन्हें निजी बातचीत की इजाजत नहीं दी गई। बातचीत इंटरकाम के जरिए हुई। पाकिस्तान सरकार ने पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की जयंती के अवसर पर हुई इस मुलाकात को ‘भव्य व्यवहार’ कहा। जाधव व उनके परिजन 22 माह के लंबे अंतराल के बाद एक-दूसरे से मिल पाए।

47 वर्षीय जाधव व उनके परिजनों के बीच 2 बजकर 18 मिनट पर मुलाकात शुरू हुई। पाकिस्तान विदेश कार्यालय के प्रवक्ता मोहम्मद फैसल ने ट्वीट कर जाधव और उनकी मां 70 वर्षीय अवंति व पत्नी चेतानकुल की खास तौर से बनाए गए कमरे में हुई मुलाकात की तस्वीर जारी की।

भारतीय उप उच्चायुक्त जे.पी.सिंह दूर से इस मुलाकात के गवाह बने। मुलाकात के दौरान पाकिस्तान विदेश कार्यालय में भारतीय डेस्क की निदेशक डॉ. फरीहा भी मौजूद रहीं। इस मुलाकात की वीडियोग्राफी की गई।

पाकिस्तानी अधिकारियों ने कहा कि यह मुलाकात ‘पूरी तरह से मानवीय आधार’ पर करवाई गई लेकिन जाधव व उनके परिवार को निजी रूप से (वन आन वन) बातचीत की इजाजत नहीं दी गई।

जाधव के परिवार को ओमान के रास्ते भारत वापस लौटने से पहले भारतीय उच्चायोग ले जाया गया। जाधव की मां ने पाकिस्तानी विदेश कार्यालय को मुलाकात की इजाजत देने के लिए शुक्रिया अदा किया।

मुलाकात के बाद विदेश कार्यालय के प्रवक्ता मोहम्मद फैसल ने जाधव को ‘भारतीय आतंकवाद का चेहरा’ बताया और कहा कि उन्हें राजनयिक पहुंच दिए जाने के बारे में सही समय पर विचार किया जाएगा। पाकिस्तान ने साथ ही यह भी कहा कि जाधव और उनके परिजनों की यह मुलाकात अंतिम नहीं है।

उन्होंने पत्रकारों से कहा, “यह अंतिम मुलाकात नहीं है, मुझे यह स्पष्ट रूप से कहना है।”

कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान में कथित जासूसी के आरोप में फांसी की सजा सुनाई गई है लेकिन यह मामला अंतर्राष्ट्रीय अदालत में लंबित है।

फैसल ने कहा कि दोनों महिलाओं ने जाधव के साथ ‘खुले तौर पर और उपयोगी बातचीत’ की। यह मानवीय आधार पर सकारात्मक पहल थी। हमने जाधव के परिवार के कहने पर मुलाकात के समय में 10 मिनट की बढ़ोतरी की। इसका कानूनी प्रक्रियाओं से कुछ संबंध नहीं है।

प्रवक्ता ने भारतीय उप उच्चायुक्त जे. पी. सिंह की मुलाकात के दौरान मौजूदगी के बावजूद स्पष्ट रूप से इनकार किया कि यह राजनयिक पहुंच थी। सिंह दूर से इस मुलकात के गवाह बने।

उन्होंने कहा, “भारतीय राजनयिक मुलाकात देख सकते थे लेकिन उन्हें मिलने की इजाजत नहीं दी गई थी। अगर भारतीय राजनयिक जाधव से बातचीत करते, तो यह राजनयिक पहुंच होती।”

उन्होंने साथ ही कहा कि राजनयिक पहुंच सुनिश्चित कराने के लिए भारत ने आग्रह किया है और ‘सही समय आने पर इस पर विचार किया जाएगा।’

फैसल ने यह भी कहा, “पाकिस्तान चाहता था कि जाधव की मां व पत्नी इस्लामाबाद के विदेश कार्यालय में भारतीय मीडिया समेत मीडिया से बातचीत करें। यह इसलिए किया जा रहा था कि पाकिस्तान के पास छुपाने के लिए कुछ नहीं है और आप सभी ऐसे बहुत सवालों के जवाब चाहते थे जिनका अबतक जवाब नहीं मिला है। लेकिन, भारतीय पक्ष ने जाधव के परिजनों को मीडिया से दूर रखने का आग्रह किया।”

फैसल ने कहा कि इस मुलाकात का यह मतलब नहीं है कि जाधव को लेकर पाकिस्तान के रुख में कोई बदलाव आया है। उन्होंने जाधव को ‘एक जासूस और आतंकवादी बताया जिसे मौत की सजा मिली हुई है।’

उन्होंने कहा, “जाधव पाकिस्तान में भारतीय आतंकवाद का चेहरा है। उन्होंने असलम चौधरी की हत्या के जुर्म को कबूला है। उन्होंने पाकिस्तानी लोगों की हत्या पर अफसोस जताया है। वह नौसेना के एक अधिकारी थे और खुद के रॉ एजेंट होने की बात स्वीकारी है।”

इस बीच, पाकिस्तान विदेश मंत्रालय ने प्रोपेगेंडा के तहत एक वीडियो जारी किया है जिसमें जाधव को पाकिस्तान के ‘भव्य व्यवहार’ के लिए धन्यवाद देते हुए दिखाया गया है।

भारत हमेशा से पाकिस्तान के आरोपों को खारिज करता रहा है और कहता रहा है कि जाधव को ईरान से अगवा किया गया जहां वह निजी व्यापारिक दौरे पर थे और वहां से उन्हें पाकिस्तान लाया गया। जाधव भारतीय नौसेना से सेवानिवृत्त होने के बाद व्यापार में लगे थे।

मौत की सजा के बावजूद पाकिस्तान ने बीते हफ्ते कहा कि जाधव के सिर पर तुंरत मौत की सजा दिए जाने का खतरा नहीं है और उनकी दया याचिकाएं अभी लंबित हैं।

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