अभी अभी: एक इंजीनियर ने तोड़ दिया बाबा का तिलिस्म, बीजेपी के लिए खतरे की घंटी

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Lucknow. गोरखपुर 28 साल से दबदबा बनाने वाली बीजेपी का तिलिस्म टूट गया है। बीजेपी के इस किले को महज 29 साल के एक इंजीनियर ने ढहा दिया। आइए जानते हैं आखिर कौन हैं गोरखपुर से सांसदी जीत चुके इंजीनियर प्रवीण निषाद।

प्रवीण निषाद पेशे से इंजीनियर हैं। वह गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी लखनऊ से 2011 में इंजिनियरिंग कर चुके हैं। प्रवीण साधारण परिवार से हैं।
उनके खिलाफ कोई भी आपराधिक केस अभी नहीं है और न ही उनके पास जमीन है। प्रवीण ने डिस्टेंस लर्निंग से एमबीए भी किया है। यह उनका पहला चुनाव है।

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प्रवीण की पत्नी रीतिका सरकारी नौकरी करती हैं। प्रवीण ने अपनी कुल संपत्ति लगभग 11 लाख रुपये बताई है, जिसमें उनके पास 99,000 की देनदारी भी बाकी है। प्रवीण और रीतिका को एक बेटा और एक बेटी भी है।

जातिगत समीकरण काम आए
जातिगत समीकरण को ध्यान में रखते हुए प्रवीण को टिकट दिया गया था। वह युवा होने के साथ साथ बेदाग छवि के हैं। सपा से उन्हें टिकट मिला और बीएसपी का साथ। यही उनकी जीत की संजीवनी बन गई।

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योगी ने 3 लाख के अंतर से जीता था चुनाव
प्रवीण को गोरखपुर के उपचुनाव में कुल 4,56,513 वोट मिले। वहीं दूसरे नंबर पर रहे बीजेपी उम्मीदवार उपेन्द्र शुक्ल को 4,34,625 वोट मिले। आपको बता दें कि 2014 के लोकसभा के चुनाव में योगी आदित्यनाथ ने इस सीट पर लगभग 3 लाख वोटों के अंतर से चुनाव जीता था।

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ये हैं बीजेपी के हारने की मुख्य वहज
बीजेपी के अंदर अति आत्मविश्वास और गुटबाजी। पुराने कार्यकर्ताओं की नाराजगी और मंत्रियों के बेतुके बयान। पीठ बनाम भाजपा का शीतयुद्ध कायम। वहीं अति पिछली जातियों ने इस बार भाजपा का साथ नहीं दिया। जातीय समीकरण भी भाजपा के अनुकूल नहीं थे। इलाहाबाद पश्चिम में कायस्थों ने सपा पर विश्वास जताया।

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