राम मंदिर से भी बड़ा मुद्दा, अगर इसे रोका नहीं तो नष्ट हो जाएगी काशी

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राम मंदिर विवाद अभी हल नहीं हो पाया है कि मोदी सरकार में एक दूसरा बड़ा विवाद ​पैदा हो गया है। कहा जा रहा है कि अगर यह विवाद सुलझा नहीं तो काशी नगर नष्ट हो जाएगी। आरोप है कि​ सरकार शिव के वास्तु से खिलवाड़ कर रही है। सरकार 50 से अधिक प्राचीन मंदिरों को तोड़ देगी।

दरअसल पिछले अगस्त 2014 में पीएम मोदी जापान गए थे यहां पर उन्होंने जापान के पीएम शिंजो अबे के साथ एक समझौता किया था जिसमें काशी को क्योटो की तरह बनाना था। इसीलिए बनारस के ललिता घाट से विश्वनाथ मंदिर तक दो सौ से अधिक भवन चिन्हित किए गए हैं, जिन्हें तोड़ा जा रहा है। बताया जा रहा है कि इनमें लगभग 50 की संख्या में प्राचीन मंदिर व मठ शामिल हैं। ये सभी काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की ज़द में आने वाले मंदिर हैं। इन मंदिरों को की रक्षा के लिए शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद के शिष्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद 12 दिन के उपवास पर बैठे हैं।

क्या कहते हैं स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद
काशी का पक्का महाल ऐसे वास्तु विधान से बना है जिसे स्वयं भगवान शिव ने मूर्तरूप दिया था। ऐसे में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के कारण पक्का महाल के पौराणिक मंदिरों और देव विग्रहों को नष्ट करने से काशी ही नष्ट हो जाएगी। पक्का महाल ही काशी का मन, मस्तिष्क और हृदय है। पक्का महाल ऐसे वास्तु विधान से बना है जिसे स्वयं भगवान शिव ने मूर्तरूप दिया था। ऐसे में इसके नष्ट होने से काशी के नष्ट होने का खतरा है।

जानें क्या है पक्का महाल का महत्व ?

कहा जाता है कि काशी को जानना समझना हो तो पक्का महाल को समझना ज़रूरी है। यह इलाका खुद में कई संस्कृतियों को समेटे हुए है। देश का ऐसा कोई राज्य नहीं जिसका प्रतिनिधित्व पक्का महाल न करता हो। अलग-अलग राज्यों की रियासतों की प्राचीन इमारत व वहां पूजे जाने वाले पौराणिक मंदिर और देव विग्रह इसी क्षेत्र में स्थित हैं। जिनके दर्शन करने पूरे देश से लोग आते हैं. पक्का महाल में बंगाली, नेपाली, गुजराती, दक्षिण भारतीय समुदायों के अपने अपने मुहल्ले हैं।

काशी में विकास के बहुत से कार्य हुए हैं लेकिन पौराणिक महत्व रखने वाले धरोहरों को कभी नष्ट नहीं किया गया, न ही इन्हे छेड़ा गया. लेकिन आज काशी का यही पक्का महाल विकास की भेंट चढ़ने जा रहा है। हजारों हजार साल पुरानी विरासत को मिटाने की साजिश को विकास जामा पहना दिया गया है। जिससे काशी का हृदय कहे जाने वाला पक्का महाल इन दिनों सहमा सा है, क्योंकि इसके वजूद पर संकट खड़ा हो गया है !

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