सुरक्षा पर सवाल! यूपी की जेलों में 13 साल में 26 वारदात

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लखनऊ। बागपत जेल में सोमवार को माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद उत्तर प्रदेश की जेलों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं। लेकिन यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी सूबे की विभिन्न जेलों में सुरक्षा कर्मियों की घोर लापरवाही के चलते तमाम वारदात हो चुकी है। आकड़े बताते हैं कि पिछले 13 साल में यहां की जेलों के अंदर 26 वारदात हुईं, जिनमें हत्या की भी कई घटनाएं शामिल हैं। इसके बावजूद प्रदेश में जेल सुरक्षा व्यवस्था बड़ी ही दयनीय है। यूपी की जेलों में तैनात सुरक्षाकर्मियों की मदद से कैदी जेल मैनुअल का मजाक उड़ाते हुए प्रतिबंधित चीजों का जमकर उपयोग करते हैं। समय-समय पर जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों के निरीक्षण के दौरान ये लापरवाहियां उजागर हो चुकी हैं और कुछ दोषी कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई भी होती रही है, लेकिन नतीजा वही ढाक के तीन पात।

इन जिलों में हुई घटनाएं
वर्ष 2005 में 15 मार्च को वाराणसी के कें्रद्रीय कारागार में मुन्ना बजरंगी के शार्प शूटर अनुराग उर्फ अन्नू त्रिपाठी की गोली मारकर हत्या कर दी गयी थी। अन्नु त्रिपाठी बंशीलाल यादव की हत्या के आरोप में वाराणसी की जेल में बंद था। कानपुर देहात के माती जेल में 16 मार्च, 2012 को सजायाफ्ता बंदी रामशरण सिंह भदौरिया की संदिग्ध हालत में बैरक के अंदर ही मौत हो गयी थी। इस घटना के बाद बंदियों ने बंदी रक्षक गोविन्द यादव, शिव दयाल, अरुण कुमार को बंधक बनाकर बेरहमी से पीटा था। जेल में पथराव भी हुआ था, जिसमें प्रधान बंदी रक्षक बृजनंदन लाल, बंदी रक्षक अतर सिंह गंभीर रुप से घायल हो गये थे। इस मामले में बंदियों का आरोप था कि वसूली को लेकर जेल के सुरक्षा कर्मियों ने देर रात रामशरण की पिटाई की थी, जिससे उसकी मौत हो गयी। बाद में जेल कर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था।

मेरठ के कारागार में 18 अप्रैल 2012 को जेल अधिकारियों द्वारा जेल के अंदर तलाशी के दौरान कैदियों ने बवाल कर दिया। बवाल इतना बढ़ गया कि उसे काबू में करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल को बुलाना पड़ा। स्थिति को संभालने के लिए गोली भी चलानी पड़ी, जिसमें एक बंदी मेहरादीन पुत्र बाबू खां की मौके पर ही मौत हो गई थी। इस घटना में गंभीर रुप से घायल कैदी सोमवीर ने इलाज के दौरान 24 अप्रैल को दम तोड़ दिया था।

गाजीपुर जेल में 14 फरवरी 2014 को निरीक्षण के दौरान जिला प्रशासन के अधिकारियों व कैदियों के बीच कहासुनी हो गयी थी। यह विवाद भी खूनी संघर्ष में तब्दील हो गया था। आक्रोशित कैदियों को काबू में करने के लिए जब बल का प्रयोग किया गया तो एक बंदी विश्वनाथ प्रजापति की मौत हो गयी। परिजनों ने पुलिस पर हत्या का आरोप लगाकर जिला प्रशासन से न्याय की गुहार लगायी थी।17 जनवरी, 2015 को मथुरा की जेल में बंदियों के दो गुट आपस में भिड़ गए थे। इस दौरान एक बंदी द्वारा रिवाल्वर से दूसरे बंदी पिन्टू उर्फ अक्षय सोलंकी पुत्र सत्येन्द्र सोलंकी की हत्या कर दी थी। कन्नौज जनपद के अनोगी जेल में 21 मई 2017 को जेलरों द्वारा एक कैदी की पिटाई से नाराज कैदियों ने देर रात बवाल कर दिया। शांत कराने के लिए पहुंचे जेल अधीक्षक यूपी मिश्रा को घेरकर कैदियों ने हाथापाई शुरू कर दी। जेलर को बचाने पहुंचे डिप्टी जेलर सुरेन्द्र मोहन को भी कैदियों ने जमकर पीटा था। बवाल को शांत कराने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल को बुलाना पड़ा था।

जौनपुर की जिला जेल में 19 दिसम्बर 2017 की रात कैदियों के दो गुटों के बीच बवाल हो गया था। इसमें लोहे के पाइप का इस्तेमाल किया गया, जिससे कई कैदी लहूलुहान हो गये थे। पुलिस और जेल के अधिकारियों ने किसी तरह हालात पर काबू पाया। इस खूनी संघर्ष में कुख्यात अपराधी प्रमोद राठी सहित छह बदमाश घायल हुए थे। इससे पहले फर्रूखाबाद के फतेहगढ़ जिला जेल में 26 मार्च 2017 साथी को सही समय पर इलाज न मुहैया कराये जाने पर कैदियों ने हंगामा शुरु कर दिया। इस दौरान कैदियों ने जेलकर्मियों पर पथराव कर जेल के भंडार गृह में आग लगा दी थी। इस बवाल में प्रभारी जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी और जेल अधीक्षक समेत कई अधिकारियों को चोटें आयी थीं।

बागपत की जेल में मारे गए माफिया मुन्ना बजरंगी के ऊपर कई बार प्राण घातक हमले हो चुके थे। इससे पहले झांसी जेल में भी उस पर हमला होने की बात प्रकाश में आयी थी। उसकी पत्नी सीमा सिंह ने भी पति की हत्या की साजिश की बात की थी। इससे पहले 11 सितम्बर 1998 में दिल्ली पुलिस व एसटीएफ से मुठभेड़ में मुन्ना बजरंगी को 11 गोली लगी थी, लेकिन वह बच गया था। इस तरह आंकड़े बताते हैं कि करीब 13 वर्षां में प्रदेश के मेरठ, गाजीपुर, मथुरा, वाराणसी, जौनपुर, फतेहगड़, कन्नौज, प्रतापगढ़ बलिया, हमीरपुर, गोरखपुर, सुल्तानपुर लखनऊ, बहराइच, उन्नाव, सुल्तानपुर, हरदोई, कानपुर देहात, मऊ, मुजफ्फरनगर, नैनी, गोण्डा एवं एटा के कारागारों में हत्या, जानलेवा हमला, खुनी संघर्ष, कैदियों व बंदी रक्षको में मारपीट जैसी करीब 26 वारदातें हो चुकी हैं। प्रदेश की जेलों में हो रही वारदातों को देखते हुए वहां बंद कैदी खुद को अब असुरक्षित महसूस करने लगे हैं। इस संबंध में अपर पुलिस महानिदेशक जेल चन्द्र प्रकाश का कहना है कि जेलों में बिगड़ी व्यवस्था को सुधारने के लिए अब कड़ी नजर रखी जायेगी। उन्होंने बताया कि वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा जेलों का निरीक्षण भी अब नियमित होगा। लापरवाही पर विधिक कार्रवाई भी की जायेगी। आगे बताया कि शासन भी इस मामले को लेकर गंभीर है और जेलों के अंदर की व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए एक प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक सुलखान सिंह की अध्यक्षता में एक तीन सदस्यीय कमेटी का भी गठन किया गया है।

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