आईआईएम की डिग्री के नाम पर टकराव बढ़ा

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नई दिल्ली। भारतीय प्रबंधन संस्थानों (आईआईएम) को स्वायत्तता मिले अभी छह महीने भी नहीं हुए हैं, लेकिन उनका मानव संसाधन विकास मंत्रलय के साथ टकराव शुरू हो गया है। मास्टर्स की डिग्री टकराव का आधार बनी है। दरअसल, कुछ आईआईएम अपने छात्रों को एमबीए की नहीं बल्कि एमआईएम (मास्टर इन मैनेजमेंट) की डिग्री देना चाहते हैं, जबकि मंत्रलय का कहना है कि ये डिग्री यूजीसी एक्ट के तहत फिलहाल मान्य नहीं है। अगर आईआईएम यही डिग्री देना चाहते हैं तो पहले उन्हें यूजीसी या मंत्रलय से इस डिग्री के लिए अनुमति लेनी होगी।

सूत्रों के मुताबिक, आईआईएम बिल पारित होने के बाद मंत्रलय के साथ हुई बैठक में कुछ आईआईएम के निदेशकों ने एमबीए की जगह एमआईएम की डिग्री देने, एक साल में एमबीए की डिग्री देने और तीन महीने और छह महीने के एक्जीक्यूटिव प्रोग्राम में भी डिग्री देने का प्रस्ताव रखा था। इन प्रस्तावों का मंत्रलय के वरिष्ठ अधिकारियों ने विरोध किया कि ये डिग्रियां कानूनी रूप से वैध नहीं होगी। आईआईएम निदेशकों ने मंत्रलय के विरोध को स्वायत्तता के खिलाफ बताया और इसे लेकर दोनों पक्षों में ठन गई।

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