अगर काम कर गया यह गड़ित तो BJP को हो जाएगी दिक्कत

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लखनऊ (संकल्प सिंह):  उत्तर प्रदेश में लोक सभा 2019 के चुनाव में BJP को  काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है ।  आपको बता दें कि 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को यूपी में 80 में से 73 सीटें मिली थीं, इसी चुनाव में सपा और बसपा ने अलग अलग उम्मीदवार खड़े किये थे और विधानसभा  चुनाव में भी एसपी और बीएसपी अलग-अलग रहीं। इस चुनाव में सपा को 47 जबकि बीएसपी केवल 19 सीटें ही मिली। जबकि यूपी की 403 सीटों की विधानसभा में बीजेपी ने अपने सहयोगियों के साथ 325 सीटों पर कब्जा किया।

अगर 2017 के विधानसभा चुनाव में एसपी-बीएसपी को मिले वोटों को अगर हर लोकसभा सीट में जोड़ दिया जाए तो बीजेपी के लिए  2019 के लोकसभा चुनाव में मुश्किलें खड़ी होनी तय मानी जा रही है।

यह है आंकड़े

आंकड़ों के मुताबिक एसपी और बीएसपी के वोटों को जोड़ दिया जाए तो 57 लोकसभा सीटों पर इस गठबंधन को औसतन एक लाख 45 हजार वोटों की बढ़त हासिल हो जाती है। जबकि 23 सीटों पर बीजेपी की औसत बढ़त मात्र 58 हजार वोट है। जबकि 2014 में बीजेपी जिन 73 लोकसभा सीटों पर चुनाव जीती थी वहां पार्टी की औसत बढ़त 1 लाख 88 हजार वोट थे। आंकड़ों का गणित बताता है कि अगर बीएसपी-एपी के वोटर एक हो गए तो बीजेपी जिन 23 सीटों पर आगे बताई जा रही है उनमें से महज चार सीटों, वाराणसी, मथुरा, गाजियाबाद और गौतमबुद्धनगर पर ही उसकी जीत का अंतर एक लाख वोटों से अधिक होगा। बता दें कि ये आंकड़े 2017 के विधानसभा वोट से लिये गये हैं। 2017 के विधानसभा में एसपी और कांग्रेस ने साथ चुनाव लड़ा था, इसलिए यह आकलन करते समय जिन सीटों पर समाजवादी पार्टी ने अपने उम्मीदवार खड़े नहीं किये थे वहां पर कांग्रेस को मिले वोटों को एसपी का वोट माना गया है।

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