होम्योपैथिक मेडिसिन बोर्ड को मिलेगा स्थायी रजिस्ट्रार

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  • 42 साल बाद टूटेगी परंपरा
  • 1978 के बाद से नहीं हुई थी स्थायी रजिस्ट्रार की नियुक्ति
Suyash Mishra
Suyash Mishra

लखनऊ (सुयश मिश्रा)। उत्तर प्रदेश होम्योपैथिक मेडिसिन बोर्ड 42 साल बाद स्थायी रजिस्ट्रार की नियुक्ति करने जा रहा है। इससे पहले बोर्ड के पास कोई भी स्थायी रजिस्ट्रार नहीं था। दूसरे विभागों के अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार के रूप में यह जिम्मेदारी दी जाती रही है। 42 साल पुरानी इस परंपरा को अब तोड़ने की तैयारी हो चुकी है।

बताया जा रहा है कि इस कोशिश के बाद न सिर्फ बोर्ड को एक स्थायी रजिस्ट्रार मिलेगा, बल्कि धीमे पड़े कार्यों को और रफ्तार मिलेगी। साथ ही अधूरे पड़े तमाम कार्य अब जल्द ही पूरे हो पाएंगे। सन 1978 के बाद पहली बार रजिस्ट्रार के चुनाव का कार्य किया गया है। रजिस्ट्रार की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही खबर आई की बोर्ड द्वारा गुपचुप तरीके से इंटरव्यू करवाया गया है। रिटेन एग्जाम देने वालों अभ्यर्थियों का रिजल्ट घोषित किए बिना गुपचुप तरीके से मनचाहे लोगों को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया है।

हालांकि इस आरोप को प्रोफेसर बीएन सिंह ने सिरे से खारिज कर दिया है। होम्योपैथिक मेडिसिन बोर्ड के अध्यक्ष प्रोफेसर बीएन सिंह ने बताया कि रजिस्ट्रार की नियुक्ति के लिए वेबसाइट के माध्यम से आवेदन मांगे गए थे। 26 नवंबर को इसकी लिखित परीक्षा भी कराई गई थी। इसमें एक पद था जिसके लिए 9 कैडिंडेट आए थे। जिसमें से एक कैंडिडेट परीक्षा में सम्मिलित नहीं हुआ जबकि एक अन्य कैंडिडेट का वेरिफिकेशन नहीं हो पाया। इसलिए उन्हें अपसेंट माना गया। कुल 7 अभ्यर्थियों ने एग्जाम दिया था।

एक जनवरी 2020 को रिजल्ट आया और 3 लोग पास हुए। जिनकी लिस्ट नोटिस बोर्ड पर चस्पा है। इसमें तीनों पास कैंडिडेट्स को डाक के माध्यम से जानकारी दी गई और 27 जनवरी को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया। तीनों अभ्यर्थियों का इंटरव्यू हो चुका है, लेकिन अभी तक रिजल्ट आउट नहीं किया गया है। प्रोफेसर बीएन सिंह ने बताया कि हम इस रिजल्ट को तब तक ओपेन नहीं करेंगे जब तक शासन से अनुमति नहीं मिलेगी। अनुमति मिलते ही हम इसे ओपेन कर देंगे।

प्रोफेसर बी.एन. सिंह अध्यक्ष होम्योपैथिक मेडिसिन बोर्ड

“रजिस्ट्रार का पद कभी पूर्ण रूप से भरा नहीं गया था। किसी न किसी को एक तरह से दोहरा चार्ज देकर काम चलाया जाता रहा। पूर्व के रजिस्टार कृष्ण कुमार बाजपेई थे उसके बाद से अफिसिएटिंग चार्ज में रजिस्ट्रार आते रहे। इस बार गवर्नमेंट की तरफ से कहा गया कि इस पोस्ट को पूर्णं रूप से सलेक्शन के माध्यम से भरा जाए।”

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