Happy Basant Panchami 2018: जानिए बसंत पंचमी का इतिहास और महत्व

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बसंत इस मान्यता का प्रतीक है कि सुख-दुख जीवन के अभिन्न अंग हैं, हमें सहज भाव से दोनों का स्वागत करना चाहिए। जो लोग निराशा और दुखों को अपनी किस्मत मान बैठते हैं, बसंत ऋतु उन्हें जीने की प्रेरणा देती है। वहीं ये दिन विद्यार्थियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। विद्या अर्जित करने वाले छात्र यदि पूरी निष्ठा से माता सरस्वती की पूजा करते हैं तो माता सरस्वती प्रसन्न होकर उन्हें विद्या-बु़द्ध प्रदान करती हैं। बसंत पंचमी के दिन विद्यार्थी ऐसे करें मां सरस्वती को प्रसन्न-

-बसंत पंचमी के दिन माता सरस्वती की पीले वस्त्र धारण करके विशेष पूजा करें और पीली वस्तु से माता को भोग लगाएं।
-जो विद्यार्थी शिक्षा में कमजोर हैं, आज के दिन 6 मुखी रुद्राक्ष धारण करें। इससे उनकी एकाग्रता बढ़ेगी।
-प्राण प्रतिष्ठायुक्त सरस्वती माता का चित्र अपने अध्ययन कक्ष या टेबल पर रखें।
-पढ़ाई सदा टेबल कुर्सी पर बैठ कर ही करें और मुख पूर्व या उत्तर या उत्तर -पूर्व की ओर रखें। पीठ के पीछे ठोस दीवार हो, खिड़की नहीं।
-पढने बैठने से पहले ‘‘ओम् ऐं हृं सरस्वत्यै नमः’’ का 5,11 या 21 बार मंत्र जाप करें।
-अपनी किताबों पर पीला कवर लगाकर उस पर रोली से स्वास्तिक का चिन्ह अंकित करें।
-इस दिन अपना पढ़ाई का टाईम-टेबल निर्धारित करें और इसी के अनुसार अध्ययन करें।

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