वित्त मंत्री जी को नहीं मालूम जमीनी हकीकत, SBM में बड़ा भ्रष्टाचार

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(किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार की जानकारी अगर आपके पास है तो 7007096037 पर संपर्क करें। आपका नाम और पता गोपनीय रखा जाएगा)

Suyash Mishra

Lucknow.  मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला बजट शुक्रवार को पेश किया गया। बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि 95 प्रतिशत शहरों को खुले में शौच से मुक्त किया गया है। वित्त मंत्री ने ऐलान किया कि 2014 के बाद से 9.6 करोड़ शौचालयों का निर्माण किया गया है। 5.6 लाख गांव आज देश में खुले से शौच से मुक्त हो गए हैं। वित्त मंत्री ने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन के विस्तार के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। महात्मा गांधी के आदर्शों के प्रति अपने आप को समर्पित करने का यह अवसर है। हमारी सरकार का 2 अक्टूबर 2019 तक खुले में शौच से देश को मुक्त करने का लक्ष्य है।

आंकड़ों की जमीनी हकीकत

मंत्री जी विचार नेक हैं। उनकी कार्यप्रणाली पर भी सवाल नहीं खड़े किए जा सकते, लेकिन जो आकड़ें पर दे रही हैं उनकी जमीनी हकीकत उन्हें नहीं मालूम। उत्तर प्रदेश की राजधानी का ही उदाहरण ले लीजिए।

भ्रष्टाचार से मिला ओडीएफ डबल प्लस का दर्जा!

यहां एसबीएम का प्रभारी एके राव को बनाया गया है। राव साहब पहले से ही मुख्य पशु चिकित्साधिकारी का जिम्मा संभाल रहे थे। हालांकि उन्होंने अपना जादू चलाया और कुछ ही महीनों में लखनऊ को खुले में शौचमुक्त कर दिया। अब राव साहब ने कौन सी जादू की झप्पी चलाई कि पलक झपकते लोगों ने बाहर जाना छोड़ दिया। बहरहाल जमीनी हकीकत आप सब जानते हैं।

न तो लखनऊ शहर में ओ​डीएफ डबल प्लस के मानकों को पूरा किया गया और न ही आज तक शहर खुले में शौच से मुक्त हो पाया। इसकी जांच अगर आप करना चाहते हैं। तो सुबह 6 बजे रेल की पटरियों पर नजर रखें।

पुराने लखनऊ में सीवर लाइन ही नहीं फिर कैसे बना डबल प्लस

ओडीएफ डबल प्लस का एक मानक है कि किसी भी प्रकार के शौचालय का मल खुले में नहीं बहेगा। मड़ियांव और फैजुल्लागंज के तमाम इलाकों में आज भी सीवर लाइन से घरों के शौचालयों को जोड़ा नहीं जा सका है। इतना ही नहीं पूराने लखनऊ के तमाम इलाके ऐसे हैं जहां आज तक सीवर ही नहीं पड़ी घरेलू शौचालयों का मल सीधे खुली नालियों में बह रहा है। अब सवाल यह उठता है कि इतनी घोर अनियमितता के बावजूद भी कैसे लखनऊ को डबल प्लस का दर्जा दे दिया गया।

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आज भी मानक के अनुसार सामुदायिक और सार्वजनिक शौचालय हर 500 मीटर की दूरी पर नहीं हैं। बावजूद इसके राव साहब ने फाइलों को दुरुस्त करके सरकार को गलत रिपोर्ट भेजकर क्वालिटी काउंसिल आॅफ इंडिया की टीम को भी गुमराह करने की कोशिश की है।

पहले पंकज भूषण के पास था जिम्मा

बहरहाल राव साहब से जब भी इस बात की चर्चा की गई तो वह कहते रहे हैं कि इसमें बहुत लोग शामिल हैं। एक लंबी चैन है। मैं तो अभी 6 महीने पहले आया। मेरा कोई कुछ नहीं कर सकता। मैंने इसमें कोई भ्रष्टाचार नहीं किया, जिससे किया हो उससे पूछताछ होगी। इससे पहले यह जिम्मेदारी पंकज भूषण जी के पास थी।

अब सवाल फिर वहीं उठता है कि जब राजधानी लखनऊ की हालत ये है तो यूपी का क्या? वह अलग बात है कि वित्त मंत्री पूरे देश का आंकड़ा दे रहीं थी। लेकिन कम से कम उत्तर प्रदेश में शौच से मुक्त शहर की स्थिति सिर्फ भ्रम पैदा करने वाली है।

जल्द होगी पीआईएल

अभी साक्ष्यों का संकलन चल रहा है। इस मामले में जल्दी ही पीआईएल डाली जाएगी। सभासदों से लेकर अधिकारियों तक की गर्दन फस सकती है। इस मामले में एक सामाजिक संस्था ने मुख्यमंत्री से शिकायत करने की बात कही है वहीं राजधानी में बनाए गए समस्त शौचालयों की लिस्ट के लिए आरटीआई मांगी गई है।

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