मिल गया फार्मूला: हाथी के साथ से दौड़ गई साइकिल, लोकसभा में ऐसे परास्त होगी बीजेपी

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Lucknow. त्रिपुरा समेत पूर्वोत्तर राज्यों में भगवा फहराने के बाद खुशी से झूमी बीजेपी के हौसले पस्त हो गए हैं। अपने की गढ़ में भाजपा का तिलिस्म टूट रहा है। गोरखपुर सीट जिसे बीजेपी का किला कहा जाता रहा, पिछले 29 सालों से जहां उसका राज था आज वह ढह गया। वहीं आजादी के बाद पहली बार फूलपुर में खिला कमल 4 साल में ही मुरझा गया।

बीजेपी की इस हार ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। हर तरफ हवा उड़ रही है कि अब मोदी मैजिक खत्म हो गया। बीजेपी की कार्यप्रणाली लोगों को भा नहीं रही। जिस यूपी में 2014 के चुनाव में 73 सीटों पर फगहा छा गया था वहीं आज उसका किला ही खत्म हो गया।

बीजेपी के इस किले को किसी और ने नहीं, बल्कि एक 29 साल के इंजीनियर ने गिरा दिया। यूपी में 2014 में 73 सीटों पर कब्जा करने वाली बीजेपी के लिए यह परिणाम खतरे की घंटी से कम नहीं हैं ।
लोकसभा चुनाव से पहले दो प्रमुख सीटों पर इतनी बुरी हार भाजपा के लिए मुश्किल खड़ी करने वाली है।

माया के घर पहुंचे अखिलेश ने कहा शुक्रिया
नतीजों से उत्साहित होकर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सारी दीवारे लांघते हुए बुधवार को बसपा सुप्रीमो के घर पहुंचे। उन्होंने बहन जी को समर्थन के लिए आभार कहा। अखिलेश पहली बार बुधवार शाम मायावती के घर पहुंचे दोनों के बीच 45 मिनट बात हुई।

जातिगत समीकरण काम आए
जातिगत समीकरण को ध्यान में रखते हुए प्रवीण को टिकट दिया गया था। वह युवा होने के साथ साथ बेदाग छवि के हैं। सपा से उन्हें टिकट मिला और बीएसपी का साथ। यही उनकी जीत की संजीवनी बन गई।

योगी ने 3 लाख के अंतर से जीता था पिछला चुनाव
प्रवीण को गोरखपुर के उपचुनाव में कुल 4,56,513 वोट मिले। वहीं दूसरे नंबर पर रहे बीजेपी उम्मीदवार उपेन्द्र शुक्ल को 4,34,625 वोट मिले। आपको बता दें कि 2014 के लोकसभा के चुनाव में योगी आदित्यनाथ ने इस सीट पर लगभग 3 लाख वोटों के अंतर से चुनाव जीता था।

इसलिए हार गई बीजेपी
बीजेपी के अंदर अति आत्मविश्वास और गुटबाजी। पुराने कार्यकर्ताओं की नाराजगी और मंत्रियों के बेतुके बयान। पीठ बनाम भाजपा का शीतयुद्ध कायम। वहीं अति पिछली जातियों ने इस बार भाजपा का साथ नहीं दिया। जातीय समीकरण भी भाजपा के अनुकूल नहीं थे। इलाहाबाद पश्चिम में कायस्थों ने सपा पर विश्वास जताया।

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