महिला दिवस पर आर्यकुल कालेज मेें स्पीच प्रतियोगिता

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आर्यकुल ग्रुप आॅफ कालेज में अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया गया। जिसमें कालेज के चारों हाउसों वल्लभी, तक्षशिला,उज्जैन व नालंदा के सभी छात्र-छात्राओं द्वारा महिलाओं के हितों की रक्षा एवं उन्हें सामाजिक रूप से आगे बढ़ाने के लिए विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गयी। इसमें बच्चों द्वारा स्पीच प्रतियोगिता प्रस्तुत की गयी जिसमें शिक्षकों ने भी महिलाओं के पक्ष में अपने विचार प्रस्तुत किये।


महिलाओं के साम्मान के बारे में अपना व्याखान देते हुए डॉ.स्तुति वर्मा ने कहा कि अगर आजकल की लड़कियों पर नजर डालें तो हम पाते हैं कि ये लड़कियां आजकल बहुत बाजी मार रही हैं। इन्हें हर क्षेत्र में हम आगे बढ़ते हुए देखा जा सकता है । विभिन्न परीक्षाओं की मेरिट लिस्ट में लड़कियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं। किसी समय इन्हें कमजोर समझा जाता था, किंतु इन्होंने अपनी मेहनत और मेधा शक्ति के बल पर हर क्षेत्र में प्रवीणता अर्जित कर ली है। इनकी इस प्रतिभा का सम्मान किया जाना चाहिए।

इसी क्रम में श्रीमति शिवभद्रा सिंह ने अपने विचार प्रस्तुत करते हुए कहा कि नारी का सारा जीवन पुरुष के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने में ही बीत जाता है। पहले पिता की छत्रछाया में उसका बचपन बीतता है। पिता के घर में भी उसे घर का कामकाज करना होता है तथा साथ ही अपनी पढ़ाई भी जारी रखनी होती है। उसका यह क्रम विवाह तक जारी रहता है। उसे इस दौरान घर के कामकाज के साथ पढ़ाई-लिखाई की दोहरी जिम्मेदारी निभानी होती है, जबकि इस दौरान लड़कों को पढ़ाई-लिखाई के अलावा और कोई काम नहीं रहता है। कुछ नवुयवक तो ठीक से पढ़ाई भी नहीं करते हैं, जबकि उन्हें इसके अलावा और कोई काम ही नहीं रहता है। इस नजरिए से देखा जाए, तो नारी सदैव पुरुष के साथ कंधेसे कंधा मिलाकर तो चलती ही है, बल्कि उनसे भी अधिक जिम्मेदारियों का निर्वहन भी करती हैं। नारी इस तरह से भी सम्माननीय है।

इसी क्रम में बोलते हुए  रश्मि सागर ने कहा कि विवाह पश्चात तो महिलाओं पर और भी भारी जिम्मेदारियां आ जाती है। पति, सास-ससुर, देवर-ननद की सेवा के पश्चात उनके पास अपने लिए समय ही नहीं बचता। वे कोल्हू के बैल की मानिंद घर-परिवार में ही खटती रहती हैं। संतान के जन्म के बाद तो उनकी जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। घर-परिवार, चैके-चूल्हे में खटने में ही एक आम महिला का जीवन कब बीत जाता है, पता ही नहीं चलता। कई बार वे अपने अरमानों का भी गला घोंट देती हैं घर-परिवार की खातिर। उन्हें इतना समय भी नहीं मिल पाता है वे अपने लिए भी जिएं। परिवार की खातिर अपना जीवन होम करने में भारतीय महिलाएं सबसे आगे हैं। परिवार के प्रति उनका यह त्याग उन्हें सम्मान का अधिकारी बनाता है।
   

इसके साथ ही डॉ.नवनीत बत्रा ने अपने विचार रखते हुए कहा कि महिलाओं को किसी भी अन्नाया के प्रति सवैद आवाज उठानी चाहिए अगर हम किसी भी अन्याय को अपने मन में ही बैठा लेते हुैं और यह सोचते हैं कि यह पहली बार है तो यह पूरी तरह से गलत है हमें अपने अधिकारों को समझना चाहिए तभी हमारा कल्याण सम्भव है।

इसी क्रम में संचालिका मिश्रा ने कहा कि हमें अन्याय के प्रति खुलकर आवाज उठानी चाहिए, क्योंकि अगर हम आज के युग में अगर अन्याय के प्रति जागरूक नहीं होते हैं तो यह हमारी ही गलती है इसलिए सबसे पहले तो हमें इसी बात के लिए जागरूक होना है और अपनी चुप्पी तोड़कर अन्याय के प्रति खुलकर आवाज उठाना चाहिए।

 साथ ही सुश्री स्वाती सिंह ने कहा कि आज के सरकारों के अथक प्रयास हमें इतने सारे अधिकार मिले हैं कि हम अगर उनका सभी प्रयोग करना सीख लें तो घर के अन्तरऔर बाहर हमें कोई भी दबा नहीं सकता। इसलिए हमें अपने अधिकारों को पूरी तरह से समझना चाहिए।


इस व्याखान कार्यक्रम में आर्यकुल के चारों हाउसों के बच्चों और शिक्षकों ने अपने अपने विचार प्रस्तुत किये। जिनका तालियों के साथ स्वागत किया गया।

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