मोदी सरकार पर लगा एक और कलंक, एमपी में 2 और किसानों ने की खुदकुशी

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भोपाल| एक तरफ मोदी सरकार सुशासन और सबसे अच्छी सरकार होने का दावा कर रही है वहीं मध्यप्रदेश में किसान आत्महत्या का सिलसिला रुक नहीं रहा है। राज्य में दो और किसानों ने आत्महत्या कर ली। बीते 17 दिनों में 29 किसान अपनी जान दे चुके हैं।

मध्यप्रदेश के धार जिले के टांडा थाना क्षेत्र के चुनप्पा गांव के किसान बिलम सिंह (46) ने सोमवार की देर रात फांसी लगा ली। उसने बेटे की शादी के लिए एक सूदखोर से कर्ज लिया था और उसके एवज में चांदी के गहने गिरवी रखे थे। उस पर सहकारी समिति का भी कर्ज था।

टांडा थाने के प्रभारी विजय बास्कले ने बुधवार को आईएएनएस को बताया कि पहले परिवार के सदस्यों ने आत्महत्या का कारण नशे की आदत बताया, उसके बाद उन्होंने बयान दर्ज कराया कि बिलम सिंह ने कर्ज से परेशान होकर आत्महत्या की है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

इसी तरह खरगोन के बिस्टान थाना क्षेत्र के मोगरगांव में कर्ज से परेशान किसान शंकर (35) मंगलवार को जब अपने खेत पर था, वहीं गिरकर बेहोश हो गया और उसकी मौत हो गई। अंदाजा लगाया जा रहा है कि उसने कीटनाशक पी लिया होगा।

थाना प्रभारी आनंद चौहान ने कहा, “किसान शंकर की मौत हुई है, लेकिन मौत का कारण कोई स्पष्ट तौर पर नहीं बता पा रहा है। उसके परिजनों ने भी कुछ नहीं बताया है।”

प्रदेश में 10 दिनों तक किसान आंदोलन चला था। आंदोलन के दौरान छह जून को पुलिस की गोलीबारी व लाठीचार्ज में छह किसानों की जान गई थी। 10 जून को आंदोलन खत्म होने के बाद आत्महत्याओं को दौर शुरू हो गया। 12 से 28 जून के बीच 17 दिनों में 29 किसान आत्महत्या कर चुके हैं। सरकार की ओर से कहा जा रहा है कि कोई किसान कर्ज के दवाब में आत्महत्या नहीं कर रहा है। पुलिस भी किसी किसान की आत्महत्या को ‘कर्ज के दवाब में आत्महत्या’ दर्ज करने को तैयार नहीं है। सरकार स्पष्ट कह चुकी है कि मध्यप्रदेश में किसानों का कर्ज माफ नहीं होगा।

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