कैराना में ऐसे मजबूत हो गया विपक्ष, 2019 में बीजेपी की मुश्किल बढ़ाएगा ये मिलन

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बीजेपी के मंसूबों पर पानी फेर विपक्ष ने कैरान और नूरपुर में अपनी ताकत दिखा दी। इस जीत के पीछे की वजह कई हैं। सपा ने कैराना के पार्टी विधायक नाहिद हसन की मां तबस्सुम हसन को रालोद प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतारा था। हालांकि बीजेपी इससे खुश थी क्योंकि मुजफ्फरनगर दंगे के बाद तबस्सुम के बेटे ने कई विवादित बयान दिए थे। भाजपा नेताओं ने इस चुनाव में उसे भुनाने की पूरी कोशिश की लेकिन वह कामयाब नहीं हुए। गठबन्धन के उम्मीदवार को मुस्लिम वोट और रालोद के परम्परागत मतों का लाभ मिला। बसपा के मैदान में नहीं उतरने के बावजूद विपक्षी एकता के कारण उसके वोट गठबन्धन के पक्ष में गए। महागठबंधन के कारण रालोद प्रत्याशी को जाट और मुस्लिम के अलावा दलित वोट बोनस के रूप में मिला।

तबस्सुम हसन के देवर कंवर हसन ने जिस तरह मैदान से पीछे हटते हुए अपनी भाभी को समर्थन दिया, उससे समीकरण विपक्ष के पक्ष में आ गए। कंवर हसन ने पिछले लोकसभा चुनाव में 1.66 लाख वोट हासिल किए थे। कैराना में भाजपा की हार की एक अन्य वजह पार्टी उम्मीदवार मृगांका सिंह को सहानुभूति वोट नहीं मिलना भी माना जा रहा है। पार्टी को लग रहा था कि मृगांका को टिकट देने से उसे उन लोगों का साथ मिलेगा, जिन्होंने हुकुम सिंह के पक्ष में वोट दिए थे, लेकिन नतीजों में सब उलट गया।

विपक्ष के जीत के मायने
असली मुद्दों के साथ जनता में विपक्ष की जमन मौजूद है। इस जीत के बाद विपक्ष में उत्साह बढ़ेगा। अब भाजपा को हराने में आसानी होगी। अब मुस्लिम वोटों का विखराव रुकेगा। सपा बसपा के लिए आगे का रास्ता आसान हो जाएगा। गठबंधन को आम चुनाव तक बनाए रखना विपक्ष के लिए बड़ी चुनौती होगी।

भाजपा की हार के मायने
अब भाजपा को महागठबंधन से जीत के लिए नई काट निकालनी होगी। भाजपा के लिए हिंदू वोटों को समेटना बड़ चुनौती है। अति आत्मविश्वास बीजेपी को ले डूबा है इसलिए इनको आत्म विश्लेषण करना जरूरी हो गया है। सिर्फ वादे करना मायने नहीं रखता उसे पूरा करना जरूरी है।

भाजपा को लगातार तीसरा झटका
भाजपा की यह तीसरी हार है इससे पहले भाजपा को गोरखपुर और फूलपुर लोक सभा उप चुनाव में भी हार का सामना करना पड़ा था। गोरखपुर में सपा के प्रवीण कुमार निषाद ने भाजपा के उपेंद्र दत्त शुक्ला और फूलपुर में सपा के नागेंद्र प्रताप सिंह पटेल ने भाजपा के कौशलेंद्र सिंह पटेल को हराया था। गोरखपुर सीट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और फूलपुर उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के इस्तीफे से खाली हुई थी।

क्या थी 2014 की स्थिति
2014 के लोकसभा चुनाव में एक भी मुस्लिम प्रत्याशी को उत्तर प्रदेश से जीत नहीं नसीब हुई थी। भाजपा ने सूबे की 80 लोकसभा सीटों में से 71, उसके सहयोगी अपना दल ने 02 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि समाजवादी पार्टी में मुलायम कुनबे को 05 और कांग्रेस को महज 02 सीटें नसीब हुईं थीं।

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