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चेन्नई,31 अगस्त । पिछले सात साल से किसी शतरंज खिलाड़ी को अर्जुन अवॉर्ड नहीं मिला है और दिग्गज विश्वनाथ आनंद को उम्मीद है कि चेस ओलिंपियाड में भारतीय टीम के चैंपियन (संयुक्त रूप से) बनने के बाद अगले साल राष्ट्रीय पुरस्कारों की सूची में इस खेल से जुड़े किसी खिलाड़ी का नाम होगा। रविवार को रूस के साथ भारतीय शतरंज टीम संयुक्त रूप से चेस ओलिंपियाड चैंपियन बनी।

आनंद ने कहा, ‘मुझे उम्मीद है कि इससे कई सकारात्मक चीजें शुरू होगी जिसमें खेल मंत्रालय द्वारा अर्जुन पुरस्कार के लिए पुनर्विचार और शतरंज के लिए द्रोणाचार्य अवॉर्ड भी शामिल है। बहुत लंबा समय गुजर (जब किसी शतरंज खिलाड़ी को यह पुरस्कार मिला हो) गया है।Ó आनंद खुद भी अर्जुन अवॉर्ड के अलावा देश के सर्वोच्च खेल पुरस्कार खेल रत्न के विजेता रहे हैं।

शतरंज के लिए अर्जुन पुरस्कार हासिल करने वाले आखिरी खिलाड़ी अभिजीत गुप्ता थे, जिन्हें 2013 में यह पुरस्कार मिला था। शतरंज में सिर्फ दो कोच को ही अब तक द्रोणाचार्य पुरस्कार मिला है, जिसमें रघुनंदन वसंत गोखले (1986) और कोनेरू अशोक (2006) का नाम शामिल है।50 वर्षीय आनंद ने कहा, ‘कई बार आपको अपनी मौजूदगी का अहसास कराना होता है और मुझे उम्मीद है कि इससे कई चीजों के लिए सकारात्मक प्रेरणा मिलेगी।

पांच बार के विश्व चैंपियन आनंद को भारत के विजेता बनने की उम्मीदों को उस समय झटका लगा था जब निहाल सरीन और दिव्या देशमुख ने सर्वर के साथ कनेक्शन नहीं बन पाने से अपना मैच गंवा दिया। आनंद ने कहा, ‘मैंने ऐसा सोचा नहीं था। मेरा मतलब है कि स्पष्ट रूप से हमारे पक्ष में सबसे मजबूत तर्क यह था कि सर्वर के साथ कनेक्शन की गलती हमारी तरफ से नहीं थी। उन्होंने कहा, ‘इस मामले में यह तुरंत पता चल गया कि हमारी ओर से कोई गलती नहीं है। ऐसे में फिडे को हमारी मांग मांगनी पड़ी।Ó इस दिग्गज ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि इन मुकाबलों को दोबारा खेला जाएगा।

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