69वां गणतंत्र दिवस

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लखनऊ (संकल्प सिंह): जैसा कि सबको ज्ञात है आज हम पूर्व वर्ष की तरह फिर से स्वतंत्र भारत के 69 वे गणतंत्र दिवस के उपलक्ष में राष्ट्र को नमन करने के लिए तैयार हैं। हमारे लिए यह परम गर्व की बात है कि ऐसे राष्ट्रीय पर्व सचमुच हमें याद दिलाते हैं कि हम सब विश्व के सबसे बड़े प्रजातंत्र देश में एक हैं और स्वतंत्र हैं गणतंत्र प्रजातंत्र का एक ही स्वरुप है। गणतंत्र तथा प्रजातंत्र की परिभाषा है, जिसमें राजकीय सुविधाओं के लिए सब समान हैं।
प्राचीन भारत में ऋषियों ने इसके लिए एक नारा भी दिया था, “वसुधैव कुटुंबकम” का अर्थात् सभी को एक कुटुंब के रूप में रहना चाहिए तथा हम सबको मिल- बांट कर खाना चाहिए और हिल-मिल कर रहना चाहिए और यह तभी संभव होगा, जब इस बात को जन-जन समझेगा। हमारे देश के गणतंत्र ने भी अहिंसा, प्रेम ,समानता और भाईचारे को ही अपनाया है।हम सभी सोचते हैं कि कोई ऐसा फार्मूला बताया जाए , जिससे मनुष्य चैन से रहें और दूसरों को भी चैन से रहने दे। स्वयं खाए, प्रगति करें तथा दूसरों को भी खाने दे और प्रगति करने दे। व्यक्ति ख़ुद हँसे और दूसरों को भी हंसाए। वह स्वयं भी खिले और दूसरों को भी खिलने का अवसर दे । व्यक्ति जिए और दूसरों को भी जीने दे। यही व सिद्धांत है, जिसे गणतंत्र कहते हैं। इस सिद्धांत को आसानी से ग्रहण करने के लिए ही देश के महान राष्ट्र नेताओं ने सन 1950 की 26 जनवरी को संविधान के रूप में एक ऐसी जबरदस्त ताकत को प्रदान किया जो हमें मजबूर करती है कि हम मिलजुल कर रहें। और मिलजुल कर ही खाना खाएं इसके अलावा अन्य कोई रास्ता नहीं है वास्तव में हम सब के लिए या एक गौरवशाली दिन है।
आज ही वह महत्वपूर्ण दिवस है जब हमें नया और अपना संविधान मिला था। इस दिन की अपनी एक गौरवमयी गाथा और महत्व है। दरअसल हमारे देश की सदियों की परतंत्रता की बेड़ियाँ तो वास्तव में 15 अगस्त 1947 को टूटी और भारत अंग्रेजों के शासन से मुक्त हुआ लेकिन आजादी के बाद भी हम पूर्ण रुप से स्वतंत्र ना थे क्योंकि हमारा कोई अपना संविधान ना था।

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