सावधान! विवेक तिवारी हत्याकांड के बाद आपने गाड़ी से प्रेस हटवाया कि नहीं

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मेरे मित्र शर्मा जी शुरुआत से ही तड़कते भड़कते पत्रकार रहे हैं। फोन उठते ही… वह अधिकारियों को रौब में लेते हुए कहते हैं ‘नमस्कार मैं शर्मा बोल रहा हूं पत्रकार’ यह उनका तकिया कलाम है। वैसे पहले तो वह जिला प्रशासन, मंडी परिषद, नगर निगम जैसे विभाग मेें ​जमे थे, लेकिन दुर्भाग्यवश पिछले दो महीने से क्राइम बीट उन्हें दे दी गई। सुना है बड़ा आतंक मचिया दिए। ​ई विवेक तिवारी हत्याकांड का हर एंगल लिख डाला। खूब वाहवाही लूटी।

बाल में भी खाल निकाल दिए,उनका कहना था कि गलत को गलत ही लिखूंगा। …शर्मा जी हैं ही जुनूनी पत्रकार। पत्रकारिता उनके रोम रोम में ही नहीं बल्कि गाड़ी गड्डे में भी चमकती दमकती देखी जा सकती है। एकलौती चरपहिया के दोनों ओर बड़े बड़े स्टीकर पर ब्यूरोचीफ औ न जाने क्या क्या गुदवा रखा है।

कल लालबाग में एक कोपचे पर शर्मा जी की चमचमाती चारपहिया मुझे दिख गई। एक मिस्त्री बोनट पर और दूसरा डिग्गी से लगा कुछ कर रहा था। वहीं बगल में शर्मा जी भी चाय की चुश्की के साथ मोबाईल पर फेसबुक चला रहे थे। मैंने अपनी दो पहिया किनारे लगाई और पहुंचते ही बोला। आप यहां! शर्मा जी भी कुछ सहमे, मानो उनका कोई बड़ा रहस्य खुल गया हो। मैंने कुशलक्षेम पूछने के बाद धीरे से कहा क्या हुआ, तो वह बोले भइया शुक्रवार को मीडिया के प्रति पुलिसिया आक्रोश को देखकर घबरा गया हूं। इसलिए गाड़ी के दोनों ओर छपे प्रेस को सफा करवा रहा हूं।

…अरे बाबा जान है तो जहान है। पत्रकारिता अपनी जगह औ शरीर अपनी जगह। पता नहीं किस चौराहे पर धर लिया जाउं और बजा दिया जाउं। मेरे सूत्रों से पता चला है कि पुलिस पत्रकारों को कुत्तों की तरह ढूढ़ रही है। इसलिए मैं आज पत्रकारिता के सारे निशान मिटा दूंगा। उन्होंने मुझे भी कुछ ऐसी ही सलाह दी। … खैर मैंने तो पत्रकार गुदवाया नहीं है। लेकिन आप सावधान हो जाइए। सुना है अखिलेश जी जवाने में पुलिस को मिले डंडे अब भिगो भिगो पर पत्रकारों पर टेस्ट किए जाएंगे। जो भी हो पर शर्मा जी असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। हो सके तो आप भी सावधान हो जाइए!
सुयश मिश्रा की फेसबुक वाल से लिया गया

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