यूपी बोर्ड ने अपने अंग्रेजी मीडियम छात्रों से मुंह फेरा

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लखनऊ। यूपी बोर्ड ने अपने अंग्रेजी माध्यम के छात्र-छात्राओं से मुंह फेर लिया है। बोर्ड ने 2018-19 सत्र से लागू राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) पैटर्न पर आधारित 18 विषयों की 31 किताबें हिन्दी माध्यम छात्र-छात्राओं के लिए तो छपवाई है लेकिन अंग्रेजी मीडियम से पढ़ रहे बच्चों के लिए किताबें ही नहीं छपवाई गईं।
इसका नतीजा है कि नया सत्र शुरू हुए तीन महीने से अधिक का समय बीत चुका है लेकिन अंग्रेजी माध्यम से पढ़ रहे बच्चों को इक्का-दुक्का विषय की अनाधिकृत प्रकाशकों की किताबें तो मिल गई हैं लेकिन बोर्ड की अधिकृत किताबें नहीं मिल सकी है। किताबें मिलने के आसार भी नहीं है क्योंकि इनके अंग्रेजी संस्करण छपवाने की बोर्ड की फिलहाल कोई योजना नहीं है।

बोर्ड ने जो नई किताबें लागू की है उनमें कक्षा नौ में विज्ञान, गणित व सामाजिक विज्ञान, कक्षा 10 में गणित व विज्ञान, 11 में इतिहास, भूगोल, नागरिकशास्त्र, समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र, गणित, भौतिक, रसायन व जीव विज्ञान व 12वीं में गणित, भौतिक, रसायन व जीव विज्ञान शामिल है।

बोर्ड के विशेषज्ञों ने इन किताबों के हिन्दी संस्करण तैयार किये हैं जो अप्रैल के पहले सप्ताह में ही सत्र शुरू होने के साथ मार्केट में पहुंच गई थीं लेकिन इन किताबों का अंग्रेजी संस्करण बोर्ड की ओर से तैयार ही नहीं किया गया। इसका फायदा उठाते हुए कुछ अनाधिकृत प्राइवेट प्रकाशकों ने 11वीं की समाजशस्त्र समेत अन्य किताबों के अंग्रेजी संस्करण छापे हैं। लेकिन अधिकांश किताबें मार्केट में नहीं है। इस संबंध में बोर्ड सचिव नीना श्रीवास्तव का कहना है कि एनसीईआरटी किताबों के अंग्रेजी संस्करण तैयार करने के संबंध में शासन से कोई निर्देश नहीं मिला है।

कीमत अधिक होने के कारण नहीं छापी किताबें
जानकारों की मानें तो अंग्रेजी मीडियम की किताबों की कीमत अधिक होने के कारण इनकी छपाई नहीं हुई। बोर्ड के लगभग 27 हजार स्कूलों में कक्षा 9 से 12 तक में हिन्दी मीडियम से पढ़ाई कर रहे तकरीबन सवा करोड़ छात्र-छात्राओं के लिए नई किताबों का हिन्दी संस्करण छापने के लिए प्रकाशक कम कीमत पर भी तैयार हो गये। क्योंकि छात्रसंख्या बहुत अधिक होने के कारण नुकसान नहीं होता। लेकिन अंग्रेजी मीडियम के छात्रों की संख्या कम होने से प्रकाशक रुचि नहीं लेते इसलिए बोर्ड ने इसमें रुचि नहीं ली।

फिर अंग्रेजी की मान्यता ही क्यों देता है यूपी बोर्ड
इलाहाबाद। सीबीएसई के नक्शेकदम पर चलते हुए बसपा सरकार में ही यूपी बोर्ड ने कक्षा 6 से 12 तक की अंग्रेजी की मान्यता देनी शुरू कर दी थी। कई स्कूलों ने अंग्रेजी माध्यम की अलग से मान्यता ली है। जबकि इलाहाबाद में ही वशिष्ठ वात्सल्य पब्लिक स्कूल पूरी तरह से अंग्रेजी मीडियम से संचालित है। मजे की बात है कि यूपी बोर्ड अपने प्रश्नपत्र तक अंग्रेजी में छपवाता है लेकिन बच्चों को पढऩे के लिए किताबें उपलब्ध कराने में असमर्थ है।

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