ब्राम्हणों सावधान! आने वाले भविष्य के हाथ में कटोरा होगा

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देशभक्ति और धर्मनिष्ठा का पूरा ठेका ब्राम्हण ठाकुर और बनिया ने अपने सर पर उठा रखा है। यही कारण है कि ये सबसे ज्यादा मोदी मोदी करते हैं। वक्त आने पर ठाकुर तो छीनकर भी खाने का मादा रखते हैं। बनिया भी बना ही लेंगे। स्थिति ब्राम्हण देवता की बहुत ही दयनीय है, क्योंकि इनके परंपरागत कार्य भी लगभग छिन चुके हैं। कई जातियों ने इस पर कब्जा कर लिया है। अब इनके पास न तो करने को कुछ बचा है और न ही कमाने को।

झूठी शान भी इनकी कम नहीं है छोटे मोटे काम रास नहीं आएंगे भूंख से चाहे प्राण निकल जाएं। जातिवादी राजनीति की उठापटक के बीच आने वाले भविष्य को देखते हुए अब यह समझना बेहद जरूरी हो गया है कि हमारा असल हमदर्द है कौन। ये तीनों जातियां अगर इस पर विचार करेंगी तो खुद को अकेला ही पाएंगी। बावजूद इसके कभी भगवान राम केे नाम पर, कभी गेरूए रंग के नाम पर तो कभी देश के नाम पर ये बीजेपी के पाले में अड़ कर खड़े हो जाते हैं। जबकि वास्तविकता तो यह है कि इन तीनों को धर्म, राम, हिन्दुस्तान और गेरूए रंग के नाम पर लुल्ल बनाया जा रहा है। न तो इन तीनों की स्थिति को कोई समझने वाला है और न ही इनकी भविष्य की समस्याओं को लेकर चिंतित। हालही में आपने टीना बॉबी और अंकित श्रीवास्तव का किस्सा सुना ही होगा ।

किस तरह आरक्षण ने टीना को टापर बनाया और अंकित ज्यादा अंक पाकर भी सलेक्ट नहीं हो सके। इतना ही नहीं लोकसभाचुनाव से पहले बीजेपी ने राज्यसभा में प्रमोशन में आरक्षण के समर्थन में सांसदों के लिए व्हिप जारी किया था, वह लगातार इसके समर्थन में है। वहीं बुधवार को फिर एससी एसटी एक्ट में तुरंत गिरफ्तारी वाले पुराने कानून के लिए केंद्रीय कैबिनेट में मंजूरी दे दी गई है। बावजूद इसके हम बीजेपी की जयजय कार करते थक नहीं रहे। सच कहें तो कभी कभी लगता है कि हम कितने बड़े चूतिए होते जा रहे हैं। राम, गेरूवा रंग, देश​भक्ति के जाल में ऐसा फस गए हैं कि अपने आने वाले भविष्य के हांथों में आता हुआ कटोरा तक नहीं देख पा रहे।

मैं राम के नाम पर अब लुल्ल नहीं बनने वाला। मुझे आने वाले भविष्य की चिंता है। ”हम तुम्हारे हैं पर तुम्हारे लिए नहीं हैं’ हमें ऐसा समझने वाली इस पार्टी का घंटा बजाने का वक्त आ गया है। मैं नास्तिक ही सही पर अयोध्या में मंदिर बने या न बने, पाकिस्तान के खिलाफ सर्जिकल स्टाइक हो या न हो, देशभक्ति के नाम पर नोटबंदी हो या न हो हमे इससे कोई लेना देना नहीं है। हमारे लिए आपने पाच साल में क्या किया मैं तो बस इस नाम पर ही वोट दूंगा, स्वार्थी ही सही । कुछ लोग यह भी कह रहे होंगे की फिर आप किसे देंगे, कोई तो हमारा नहीं है तो मैं जवाब दूंगा कि सब पराए हो गए यह समझकर रहना ठीक है कोई अपना है इस झूठ के साथ मैं अब और नहीं रह सकता।

साभार— सुयश मिश्रा की वाल से

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