बंद का नहीं दिखा इतना असर, इन राज्यों में हुईं छुटपुट घटनाएं

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Lucknow. आरक्षण के विरोध में भारत बंद का ज्यादा असर देखने को नहीं मिला। ऐहतियातन मध्यप्रदेश के भिंड, मुरैना व ग्वालियर में कर्फ्यू लगाया गया। यूपी, उत्तराखंड, राजस्थान समेत कई राज्यों में कुछ शहरों में सतर्कतावश धारा 144 लागू की गई।

बंद के कारण पुलिस, फोर्स को बेवजह समय और ऊर्जा खर्च करनी पड़ी। देश के कई जिलों में जहां बाजार बंद रहे वहीं स्कूल कॉलेज भी नहीं खुले।

सोशल मीडिया से उपजी भारत बंद की सनसनी को मंगलवार को देश की जनता ने नकार दिया। हालांकि बिहार समेत कुछ राज्यों में छिटपुट झड़पों के बीच सामाजिक शांति को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया गया, मगर लोगों ने समझदारी दिखाई और कोई भी ¨हसक घटना या अफवाह व्यापक फलक पर नहीं आ सकी। केंद्रीय गृह मंत्रलय की एडवाइजरी के मद्देनजर राज्य सरकारों ने शांति व सुरक्षा को लेकर सतर्कता बरती।

सोशल मीडिया की ‘गुमनाम’ ताकतों ने मंगलवार को बंद का आह्वान किया था। 2 अप्रैल (भारत बंद) का मंजर लोगों के जेहन में था, लिहाजा दहशत और चर्चा में कई सवाल तैर रहे थे। कुछ शरारती तत्वों की करतूतों को छोड़ दिया जाए तो सब कुछ शांत रहा। बंद के आह्वान की यह गुत्थी अंत तक अबूझ ही बनी रही। न कोई संगठन आगे आया और न ही नेतृत्व दिखा।

अमनपसंद लोगों के कारण सोशल मीडिया से भी भारत बंद गायब रहा। जहां 2 अप्रैल का भारत बंद सोशल मीडिया पर टॉप ट्रेंड करता रहा था, वहीं मंगलवार का भारत बंद चर्चा में नहीं आ सका। दिनभर शांति के दूत महात्मा गांधी के चंपारण सत्याग्रह की शताब्दी समारोह से जुड़े आयोजन का हैशटैग ‘चलो चंपारण’ सबसे ऊपर ट्रेंड करता रहा। कड़ी सुरक्षा हा।

उत्तरप्रदेश के हापुड़-सहारनपुर, राजस्थान के जयपुर, जोधपुर और मध्य प्रदेश के ग्वालियर, भिंड-मुरैना में इंटरनेट सेवाएं बंद रहने से संपर्क बाधित रहा।

लोगों की समझदारी ने भले ही मंगलवार को भारत बंद बेअसर कर दिया हो, मगर बिहार के कुछ जिलों में बंद की आड़ में ¨हसा हुई। कईराज्यों में ऐहतियात और सतर्कता के नाम पर जहां जनजीवन अस्त-व्यस्त रहा, वहीं सुरक्षा बलों को भी अकारण परेशानी का सामना करना पड़ा।

बिहार के भोजपुर, मुजफ्फरपुर, बक्सर, वैशाली और गया में आगजनी-पथराव, तो आरा में दो गुटों के बीच फायरिंग हुई। कई स्थानों पर बंद समर्थकों ने ट्रेनें रोकने का भी प्रयास किया।

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