पहली बार दक्षिण कोरिया पहुंचा उत्तर कोरिया का तानाशाह, कहा- अतीत की गलतियां नहीं दोहराई जाएंगी

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सियोल। पहली बार उत्तर कोरिया का तानाशाह दक्षिण कोरिया पहुंचा है। उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग-उन और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जई-इन ने शुक्रवार को पहली बार एक-दूसरे के हाथों में हाथ लेकर बातचीत की। दोनों नेता बॉर्डर पर बने डिमिलिट्राइज्ड जोन (असैन्य क्षेत्र) में करीब 28 सेकंड तक हैंडशैक करते रहे। इसके साथ दोनों देशों के बीच चली आ रही 65 साल की दूरियां खत्म हो गईं। बाद में करीब डेढ़ घंटे चली बातचीत में दोनों देश शांति समझौता के लिए भी राजी हो गए। किम जोंग-उन ने कहा- अतीत की गलतियां नहीं दोहराई जाएंगी। यह मुलाकात दुनिया के लिए भी हैरत करने वाली थी, क्योंकि पिछले साल तक जो तानाशाह अपनी मिसाइलों के दम पर दक्षिण कोरिया और पड़ोसी देशों को डराता रहा। आज उसके लहजे और बातचीत में नरमी थी।

65 साल से खिंची लकीर 26 सेकंड में मिट गई

– उत्तर और दक्षिण कोरिया की डिमिलिट्राइज्ड जोन (असैन्य क्षेत्र) पर दोनों देशों के मून जई-इन और किम जोंग-उन की मीटिंग का पूरा दुनिया बेसब्री से इंतजार कर रही थी। इसे कवर करने के लिए 2833 मीडिया कर्मियों पहुंचे थे। इसमें 186 साउथ कोरिया के और 180 बाहरी देशों के मीडिया हाउस थे।
– डिमिलिट्राइज्ड जोन में मून जे-इन तानाशाह किम जोंग-उन का इंतजार कर रहे थे। किम तेजी से उनकी तरफ बढ़े। दोनों नेता पहले अपनी-अपनी सीमा में खड़े रहकर करीब 10 सेकंड तक हाथ मिलाते रहे। इसके बाद, मून ने किम को दक्षिण कोरिया की अपनी सीमा में आने की ओर इशारा किया। किम बड़ी सहजता से आगे बढ़े और करीब 8 सेकंड तक बातचीत करते रहे। इसके बाद मून ने फिर आगे बढ़ने के लिए कहा। लेकिन तभी किम ने मून को उत्तर कोरिया की जमीन (सीमा) में चलने के लिए कहा। यहां दोनों करीब 8 सेकंड तक रुके रहे। इसके बाद दोनों दक्षिण कोरिया के पन्मुन्जोम स्थित पीस हाउस (शांति घर) में चले गए थे। पीस हाउस दोनों देशों के बीच असैन्य क्षेत्र में बना मिलिट्री कंपाउंड है।

– बता दें कि दोनों देशों की आजादी के 65 साल बाद ये पहला मौका है जब उत्तर कोरिया का कोई तानाशाह दक्षिण कोरिया पहुंचा हो। 1953 के कोरियाई युद्ध के बाद ही दोनों देशों का बंटवारा हुआ था।

तानाशाह ने मून से कहा- मिसाइलों का डर दिखाकर बैचेनी बढ़ाने का दुख है

– दक्षिण कोरियाई अधिकारियों ने बताया कि इस बेहद निजी मुलाकात के दौरान किम जोंंग-उन ने मून जे-इन से कहा कि वह दशकों से चले रहे बैर को खत्म करने के लिए यहां आए हैं। हंसी भरे लहजे में उनसे यह भी कहा कि मिसाइलों का डर दिखाकर बैचेनी बढ़ाने को लेकर वह दुख व्यक्त करते हैं।

– इस दौरान उत्तर कोरिया के तानाशाह ने यह भी कहा कि वह सोल में राष्ट्रपति के ब्लू मून हाऊस देखना चाहते हैं और आगे भी इसी तरह की मुलाकातें चाहते हैं।

यह मुलाकात काफी अहम है क्योंकि…

– कुछ महीनों में किम जाेंग-उन की मुलाकात अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से होने वाली है। इसमें उत्तर कोरिया के परमाणु हथियारों पर चर्चा की जाएगी।

65 साल में दोनों देशों की तीसरी मुलाकात
– बता दें कि उत्तर और दक्षिण कोरिया 1953 के कोरियाई युद्ध के बाद दो अलग देश बने थे। इसके बाद से ही बॉर्डर जुड़े होने के बावजूद दोनों देशों में तल्खी काफी बढ़ गई थी।
– पहली बार साल 2000 में दोनों देशों ने करीबी बढ़ाने के लिए समिट में हिस्सा लिया था। हालांकि साल 2000 और 2007 दोनों ही बार समिट उत्तर कोरिया के प्योंग्यांग में आयोजित की गई। इन्हें शुरू करने का श्रेय किम जोंग-उन के पिता किम जोंग-इल को दिया जाता है। ये पहली बार है जब किम जोंग-उन बॉर्डर पार कर दक्षिण कोरिया गए हैं।

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