नगर निगम में बड़चस्व की लड़ाई! आखिर दूध का धुला कौन है?

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द्वंद्व कहां तक पाला जाए, युद्ध कहां तक टाला जाए।
तू भी है राणा का वंशज, फेंक जहां तक भाला जाए।

ये पंक्तियां नगर निगम पर में चल रहे दो प्रभावशालियों पर सटीक बैठती हैं। लखनऊ की मेयर संयुक्ता भाटिया और नगर आयुक्त के बीच तनातनी अब और विस्फोटक हो गई। दोनों के बीच आपसी द्वंद बार बार बाहर निकलकर सार्वजनिक रूप से स्फुटित होने लगा है। यह लड़ाई अब बड़चस्व की लड़ाई बनती दिख रही है। आखिर निगम में किसका जोर ज्यादा है नगर आयुक्त का या फिर मेयर का। आरोप प्रत्यारोप का सिलसिला चल रहा है। कभी नगर आयुक्त मेयर पर आरोप लगा देते हैं तो कभी मेयर नगर आयुक्त की जांच कराने के लिए पत्र भेज देती हैं।

आखिर दूध का धुला कौन है यह सवाल निगम के कर्मचारियों में अब चर्चा का विषय बन गया है। कर्मचारियों और अधिकारियों का एक धड़ा मेयर के खेमे में है वहीं दूसरा ग्रुप नगर आयुक्त के साथ खड़ा हो गया है। चर्चा हो रही है कि ईमानदारी का सेहरा बांधने से क्या कोई ईमानदार हो जाता है? ईमानदारी साबित करनी पड़ती है। बिजनौर में सीडिओ का पद संभाल रहे इंद्रमणि त्रिपाठी को लखनऊ नगर आयुक्त बनाने का मकसद निगम से भ्रष्टाचार को खत्म करना था। निगम में चल रही लूट को खत्म करना था लेकिन क्या वह लूट खत्म हुई यह बड़ा सवाल है और इसका जवाब आपको निगम में ही मिल जाएगा। वहीं संयुक्ता भाटिया को भी ईमानदार छवि बताते हुए बीजेपी ने लखनऊ से मेयर बनाने का फैसला किया था लेकिन क्या वह पार्टी की उम्मीदों पर अब तक खरी उतर पाई हैं? इसका भी जवाब आपको निगम में मिल जाएगा।

नगर निगम के एक बड़े नेता की मानें तो नगर निगम में सिर्फ चेहरे बदले हैं अधिकारियों के चरित्र नहीं। कुछ एक को छोड़ दे तो आज भी लूट की कहानी वैसे ही चल रही है जैसे पूर्व सरकारों में चलती रही है। एक के बाद एक कई मामले सामने आते रहे हैं। पर कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति हो जाती है। नेताजी ने कहा कि यह अच्छा समय है जब मेयर और नगर आयुक्त आमने सामने हैं। अब एक के बाद एक भ्रष्टाचार उजागर होंगे। इस लड़ाई से तमाम भ्रष्टाचारी सामने आएंगे।

क्या है पूरा मामला
महापौर संयुक्ता भाटिया ने एक ठेकेदार की शिकायत पर नगर आयुक्त व आरआर विभाग के मुख्य अभियंता के खिलाफ सतर्कता जांच की सिफारिश की है। मेयर ने 26 जुलाई को प्रमुख सचिव के नाम एक पत्र लिखकर नगर आयुक्त और मुख्य अभियंता विद्युत विभाग पर लूट का आरोप लगाया है। मेयर ने इस पत्र की कॉपी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, नगर विकास मंत्री, वित्त मंत्री के साथ शिकायत करने वाले ठेकेदार अतीक उर रहमान को भी भेजी है। इसमें उन्होंने तेलीबाग निवासी अतीक उर रहमान द्वारा प्रधानमंत्री को भेजे पत्र का हवाला देते हुए लिखा है कि शिकायतकर्ता ने नगर आयुक्त और मुख्य अभियंता विद्युत विभाग पर विभिन्न निविदाओं में लूटपाट व भ्रष्टाचार का अरोप लगाया है। शिकायतकर्ता ने कई प्रपत्र व आडियो रिकार्डिंग उपलब्ध कराई हैं। महापौर ने कहा है कि नगर निगम में पूर्व में भी कई भ्रष्टाचार हुए हैं। एक मामले में 81 लाख रुपए की रिकवरी भी कराई जा चुकी है। मेयर संयुक्ता भाटिया ने इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है।

नगर आयुक्त का पलटवार
नगर आयुक्त डॉ. इन्द्रमणि त्रिपाठी ने पलटवार करते हुए कहा कि ठेकेदार अतीक उर रहमान ने बिना टेंडर फर्जीवाड़ा कर 90 लाख रुपए के काम का बिल प्रस्तुत किया था, जिसे निरस्त कर दिया गया है। हाईकोर्ट ने भी उसे वापस कर दिया है। नगर आयुक्त ने कहा कि कान्हा उपवन में भी फर्जी तरीके से एक करोड़ रुपए के काम का टेंडर करा दिया। उसे भी निरस्त कर गया है। इस ठेकेदार के कई अन्य फर्जीवाड़े भी पकड़ में आए हैं। जिसकी जांच कराई जाएगी। उक्त ठेकेदार पर जब कार्रवाई हो रही है तो वह गुंडागर्दी पर उतर आया है उसने मुख्य अभियंता को जान से मारने की धमकी दी है। उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जा रही है। ऐसे भ्रष्टाचारी ठेकेदार के पक्ष में महापौर का खड़ा होना आश्चर्यजनक है। नगर आयुक्त ने कहा कि एक तरफ भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की बात हो रही है वहीं दूसरी तरफ भ्रष्टाचारियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। नगर आयुक्त ने कहा है कि भ्रष्टाचार के मामले में कोई समझौता नहीं होगा। हम हर जांच करवाने के लिए तैयार हैं।

यह लड़ाई पिछले डेढ़ साल से चल रही है। इससे पहले मेयर संयुक्ता भाटिया ने शासन को एक गोपनीय पत्र भेजकर नगर आयुक्त इंद्रमणि त्रिपाठी और चीफ इंजीनियर के खिलाफ भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति की जांच की सिफारिश कर दी थी। मेयर ने प्रमुख सचिव, लखनऊ के प्रभारी मंत्री, नगर विकास मंत्री और मुख्यमंत्री तक को पत्र भेज दिया था। मेयर ने आरोप लगाया था कि नगर निगम के आला अधिकारियों ने अपने रिश्तेदारों के नाम बड़े पैमाने पर बेनामी संपत्तियां खरीदी है। इसके अलावा अधिकारी अपने रिश्तेदारों और चहेतों को टेंडर दिलाने का काम करते हैं, लेकिन टेंडर न मिलने पर टेंडर तक निरस्त कर देने की शिकायतें हुई हैं। इतना ही नहीं मई 2020 में एक पत्र भेजकर मेयर ने नगर निगम के उच्च अधिकारियों को कटघरे में खड़ा कर दिया था। मेयर ने आरोप लगाया था कि हॉटस्पॉट इलाकों में बांटने के लिए खरीदे गए सैनिटाइजर में भारी घपला किया गया है। सैनिटाइजर के लिए जो खाली बोतल खरीदी गई हैं, उसमें जमकर घोटाला हुआ है 2 रुपए की खाली बोतलों को 10 रुपए के हिसाब से खरीदा गया है। मेयर के मुताबिक 50 एमएल सैनिटाइजर की 10,000 खाली बोतल खरीदी गई और प्रति बोतल आठ रुपये का लाभ कमाया गया। इसके साथ ही मास्क और अन्य उपकरण में भी अनियमितता बरती गई।

नगर आयुक्त ने दिया था ये जवाब
नगर आयुक्त ने आरोप लगाया था कि बिना किसी आधार के ऐसे आरोप लगाना दुःखद है। कोविड-19 संकट के समय मेयर का पत्र नगर निगम कर्मचारियों का मनोबल भी तोड़ सकता है। नगर आयुक्त ने कहा है कि महापौर के पत्र का जवाब पत्र से ही दिया जाएगा। इस संबंध में पूरी जानकारी के साथ शासन को एक पत्र भेजा जाएगा।

मेयर के बांउसरों का मामला भी आ चुका है सामने
मेयर की सुरक्षा में अब तक सिर्फ गनर ही रहते थे पहली बार किसी महापौर के लिए नगर निगम ने बाउंसर रखे हैं। संयुक्ता भाटिया की सुरक्षा को बाउंसरों पर सालाना 12 लाख रुपए खर्च होते हैं। इसको लेकर सपा और कांग्रेस ने विरोध दर्ज किया था। इससे पहले मेयर ने विनय कुमार सिंह नामक व्यक्ति को अपना ओएसडी नियुक्ति करने की जानकारी भेजते हुए नगर आयुक्त को पत्र लिखा था। इसमें कहा गया था कि ओएसडी की नियुक्ति के बारे में सभी अधिकारियों को जानकारी दी जाए।

जब लेखा विभाग में अपना सीए लेकर पहुंची मेयर
सितंबर 2019 में मेयर संयुक्ता भाटिया ने लेखा विभाग में अचानक छापा मारकर हड़कंप मचा दिया था। दस्तावेजों की जांच के लिए वो अपने साथ निजी चार्टड अकाउंटेंट लायी थीं। इससे साफ था कि उन्हें निगम के अधिकारियों पर बिल्कुल भरोसा नहीं था। इस दौरान उन्होंने कैश बुक, अकाउंट्स का ब्योरा, आय व्यय के खाते, भुगतान, बैलंस शीट और ऑडिट रिपोर्ट से जुड़े दस्तावेज खंगाले थे। इस छापेमारी ने नगर निगम में अफसरों और मेयर के बीच विश्वास की पोल खोल दी थी। हालांकि निगम के अधिकारियों ने इसका अंदरखाने जमकर विरोध किया था।

बहरहाल मेयर संयुक्ता भाटिया ने सीधे तौर पर कई बार नगर आयुक्त के दामन पर सीधे तौर पर आरोप लगाकर बता दिया है कि वह हर लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हैं। उन्होंने बार बार नगर आयुक्त के कारनामों की शिकायत उच्च स्तर पर की है। अब बारी नगर आयुक्त की है। नगर निगम में ईमानदारी की मिसाल कहे जाने वाले नगर आयुक्त क्या मेयर के लूप होल्स को सामने ला पाएंगे। अभी यह देखना बाकी है।

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