ज्येष्ठ माह का पहला बड़ा मंगल आज, जानें हनुमान सेतु मंदिर की कहानी

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मंगलवार 12 मई को ज्येष्ठ माह का पहला बड़ा मंगल है। लखनऊ में ये त्योहार बहुत धूमधाम से मनाया जाता था। कोरोना के चलते इस बार यह त्योहार घर में रह कर ही मनाया जाएगा। ज्येष्ठ के महीने में मंगलवार को बजरंगबली की आराधना से विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है। ऐसी मान्यता है कि जो भक्त बजरंगबली की सच्ची श्रद्धा और भक्ति से पूजा करता है उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

लखनऊ के मंदिरों में आज श्रद्धा के साथ हनुमान जी का श्रृंगार, अभिषेक, पूजन वंदन किया गया। लॉकडाउन के चलते मंदिर के पट बंद रहे लेकिन मंदिर में मौजूद पुजारियों द्वारा भगवान की आराधना की गई। लखनऊ के प्रमुख मंदिर अलीगंज के नए हनुमान मंदिर, विश्वविद्यालय विद्यालय मार्ग स्थित हनुमान सेतु मंदिर, मेडिकल कालेज चौराहा स्थित छांछी कुआं हनुमान मंदिर में भोर की आरती श्रद्धा और भक्ति के साथ की गई।

हनुमान सेतु मन्दिर की कहानी
गोमती पुल बनने और हनुमान सेतु मन्दिर की स्थापना से कुछ वर्ष पूर्व गोमती का जलस्तर बढ़ने से हर साल खतरा बना रहता था। 1960 में बाढ़ के बाद बाबा की तपोस्थली व पुराने मन्दिर के पास रहने वालों से स्थान छोड़ने को कहा गया। खतरे को देखते हुए सभी ने जमीन खाली कर दी। लेकिन बाबा नीब करौरी नहीं गए। कुछ समय बाद सरकार ने पुल का निर्माण शुरू कर दिया। यह कार्य कोलकता के एक बिल्डर को मिला था।

भक्त बताते हैं कि बाबा की बगैर अनुमति के पुल बन रहा था इस लिए पुल बनने में बाधाएं आने लगी। बिल्डर काफी परेशान होने लगे। बाद में लोगों की राय पर बिल्डर ने बाबा के चरणों में गिर पड़ा और उपाय पूछा तो बाबा ने कहा कि पहले वहां हनुमान जी का मन्दिर बनाओं। फिर क्या था हनुमान जी की कृपा से एक तरफ मन्दिर निर्माण तो दूसरी तरफ पुल का निर्माण बिना किसी बाधा के तैयार होने लगा। 26 जनवरी 1967 को मन्दिर का शुभारम्भ हुआ था।

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