केजरीवाल पर भड़कीं साध्वी प्राची, कहा- सिर्फ मलाई खाना जानते हैं

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नई दिल्ली। केजरीवाल सरकार ने फैसला लिया है कि दिल्ली के प्राइवेट और सरकारी अस्पतालों में सिर्फ दिल्लीवासियों का इलाज होगा। केजरीवाल सरकार के इस फैसले पर विश्व हिंदू परिषद की फायरब्रांड नेता साध्वी प्राची ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।

देशवासियों के साथ धोखा
डॉ. साध्वी प्राची ने कहा है कि दिल्ली के अंदर तमाम ऐसे लोग हैं जो अन्य प्रांतों से आकर रोजगार के लिए राजधानी में बसे हैं। उनके भी वोटों से केजरीवाल जीते हैं। आज उन्हीं वोटरों के सगे संबंधी जो दिल्ली में कमाने खाने गए हैंं उनका इलाज नहीं हो रहा। यह धोखा है देशवासियों के साथ देश के साथ। केजरीवाल ने जो षड़यंत्र पूर्वक अन्य प्रांतों के लोगों का इलाज न करने का ऐलान किया है यह शर्मनाक है।

दिल्ली मेें लागू हो राष्ट्रपति शासन
साध्वी प्राची ने कहा कि दिल्ली के अंदर जो यूपी के बिहार के लोगों ने केजरीवाल सरकार को वोट दिया है। उनका वोट केजरीवाल सरकार से हटा कर फिर से वोटों की गढ़ना की जाए अगर उसमें बहुमत सिद्ध नहीं होता तो केजरीवाल सरकार को बर्खास्त किया जाए। दिल्ली के अंदर राष्ट्रपति शासन लागू किया जाए।

केजरीवाल से दिल्ली नहीं संभल रही—साध्वी
केजरीवाल सरकार ने कहा है कि दिल्ली के बाहर के लोगों का इलाज दिल्ली में नहीं होगा जबकि केजरीवाल को सोचना चाहिए कि दिल्ली देश की राजधानी है और यहां हर प्रांतों के लोगों का आना जाना रहता है। ऐसे में अगर कोई अचानक कोरोना से ज्यादा सीरिएस हो जाता है तो आप उसका इलाज नहीं करोगे। साध्वी ने कहा कि केजरीवाल से दिल्ली संभल नहीं रही है। अगर वह व्यवस्थाओं को संभालने में सक्षम नहीं हैं तो कुर्सी छोड़ दें। केजरीवाल सिर्फ सत्ता की मलाई खाना चाहते हैं। देशवासियों से उनका कोई सरोकार नहीं है।

क्या है पूरा मामला
दरअसल दिल्ली में कोरोना के बढ़ते मामले को लेकर केजरीवाल सरकार ने ​बड़ा फैसला लेते हुए साफ कर दिया है कि बाहरी मरीजों का इलाज अब राज्य सरकार के अस्पतालों में नहीं होगा। दिल्ली सरकार के अंतर्गत आने वाले अस्पतालों में अब सिर्फ दिल्ली के लोगों का ही इलाज होगा। केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र वाले अस्पतालों जैसे एम्स समेत अन्य में कोई भी मरीज इलाज करा सकता है।

कैबिनेट में हुआ है फैसला
मुख्यमंत्री ने बताया कि दिल्ली कैबिनेट ने फैसला लिया है कि राज्य सरकार के अस्पताल अब दिल्ली के लोगों के लिए होंगे। केंद्र सरकार के अस्पताल में कोई भी इलाज करा सकता है। दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार दोनों के अस्पतालों में 10,000- 10,000 बेड हैं।

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