कांग्रेस की ये 5 योजनाएं जिन्हें कभी नहीं भूल सकता आम आदमी

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यूपीए सरकार पर भले ही सवाल उठते रहे हों, लेकिन उसकी कुछ योजनाएं ऐसी भी हैं जिन्होंने सबसे निचले पायदान पर बैठे आम आदमी की जिन्दगी को बदलने का काम किया है। मनमोहन सरकार के दौरान कई बेहतरीन योजनाएं शुरू हुई थीं, जो आज भी चल रही हैं। योजनाओं का सीधा फायदा आम आदमी को मिल रहा है। इससे पहले आपसे अनुरोध है कि अगर आपको हमारी रिपोर्ट सच्ची लगे और अच्छी लगे तो इसे शेयर करिएगा। कमेंट करिए। साथ ही हमारे यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब करें।

मनरेगा

बेरोजगारी देश की बड़ी समस्या है। मुझे याद है 2002 से 2005 तक का वो समय जब ग्रामीण इलाकों में 25 से 40 रूपए न्यूनतम मजदूरी थी। कितना मुश्किल होता होगा इतने कम पैसों में खर्च चलाना। मनमोहन सरकार इससे निपटने के लिए रोजगार गारंटी योजना लेकर आई थी, जिसने देश को नई ऊर्जा दी। मनरेगा के तहत साल भर में 100 दिनों का रोजगार और हर दिन 100 रुपये न्यूनतम मजदूरी तय की गई। यह योजना 2 फरवरी 2006 को 200 जिलों में शुरू की गई, 1 अप्रैल 2008 तक इसे भारत के सभी 593 जिलों में इसे लागू कर दिया गया।

डायरेक्ट बेनिफिट स्कीम
डायरेक्ट बेनिफिट स्कीम डीबीटी यानी की आम आदमी के खाते में सीधे सब्सिडी पहुंचाना। बिचौलियों की लूटमार पर सीधा प्रहार। मनमोहन सरकार की यह बड़ी उपलब्धि थी। 1 जनवरी, 2013 को इसकी शुरुआत हुई। मौजूदा केंद्र सरकार की 42 में से 26 योजनाओं में डीबीटी का प्रयोग किया जा रहा है। मोदी सरकार ने इसे व्यापक बनाने का फैसला लिया है. डीबीटी योजना का मुख्य स्तंभ आधार नंबर है. इसके व्यापक विस्तार का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसे दुनिया की सबसे बड़ी स्कीम के रूप में गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में जगह मिली है।

शिक्षा का अधिकार अधिनियम
एक रिपोर्ट के मुताबिक विश्व साक्षरता रैंकिंग में भारत 149 वें स्थान पर है। देश में लाखों बच्चे फीस के अभाव में स्कूल नहीं जा पाते थे। इसके लिए मनमोहन सरकार ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम बनाया। जिसमें देश के 6 से 14 वर्ष के हर बच्चे को निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा मिल रही है। यह अधिनियम पूरे देश में अप्रैल 2010 से लागू किया गया है। शिक्षा में सुधार की दिशा में यह एक बड़ा कदम साबित हो रहा है।

खाद्य सुरक्षा अधिनियम
भारत में भुखमरी आज भी बड़ी चुनौती है,2015 के ग्लोबल हंगर इंडेक्स के आंकड़ों के मुताबिक भारत में हर वर्ष 3000 से ज्यादा लोगों की मौत भूख से होती है। इसमें सबसे ज्यादा बच्चे होते हैं। यूपीए सरकार ने 10 सितम्‍बर, 2013 को इससे निपटने के लिए खाद्य सुरक्षा अधिनियम को लागू किया। इसके जरिए देश की दो तिहाई आबादी को आज भी 3 रूपए प्रति किलो के हिसाब से चावल, 2 रूपए में गेहूं और 1 रूपए प्रति किलो में अन्य अनाज मिल रहा है। इस योजना से 75 प्रतिशत ग्रामीण और 50 प्रतिशत शहरी गरीबों को सीधा फायदा हो रहा है।

सूचना का अधिकार
आपके प्रधान जी पंचायत में क्या काम कर रहे हैं। विधायक जी कौन कौन सी योजनाओं में कितना पैसा खर्च कर रहे हैं, सांसद जी किन योजनाओं का फीता काट रहे हैं। यह सब जानकारियां आप मात्र 10 रुपए खर्च करके आसानी से प्राप्त कर सकते हैं। मनमोहन सरकार की यह सबसे बड़ी उपलब्धि है। साल 2005 में बना सूचना का अधिकार आम आदमी का बड़ा हथियार बन गया है। जो न सिर्फ भ्रष्टाचार को रोक रहा है बल्कि भ्रष्टाचारियों के जहन में डर भी पैदा कर रहा है।

तो दोस्तों ये थीं यूपीए सरकार की वो उपलब्धियां जिनसे सीधे जुड़ा था आम आदमी। सरकार कोई भी कोई हो काम तो करना ही पड़ता है। बहरहाल इस खूबसूरत लोकतंत्र में अगर आप किसी की मोनोपॉली नहीं चाहते हैं तानाशाही नहीं चाहते हैं तो विपक्ष का रहना बहुत जरूरी है। बाकी समझदारों के लिए इशारा काफी है। धन्यवाद!

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