अब सरकारी स्कूलों में बच्चों की यूनिफार्म होगी महंगी, सरकार ने किया ऐलान

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लखनऊ। अब सरकारी स्कूलों में बनने वाली यूनिफार्म के रंग कुछ और चमकीले हो सकते हैं। केन्द्र सरकार ने यूनिफार्म के मद में 50 फीसदी का इजाफा किया है। अब इसके लिए 200 रुपये की जगह 300 रुपये प्रति जोड़ा दिया जाएगा।
बीते सात सालों में महंगाई ने भले ही नए रिकार्ड बनाए हो लेकिन सरकारी स्कूली बच्चों की यूनिफार्म इससे अछूती ही रही। वर्ष 2011 से सरकारी व सहायताप्राप्त स्कूलों में यूनिफार्म के लिए 200 रुपये प्रति जोड़ा ही दिया जाता रहा है। योजना में हर बच्चे को दो जोड़ा यूनिफार्म दी जा रही है। पिछले वर्ष राज्य सरकार ने इसका रंग बदल दिया। खाकी की जगह इसे गुलाबी व भूरे रंग का किया गया। ये यूनिफार्म विद्यालय प्रबंध समिति बनवाती है। इसके लिए कपड़ा खरीद कर नाप की यूनिफार्म सिलवाने का नियम है। अभी केन्द्र सरकार ने यूनिफार्म का बजट नहीं भेजा है लेकिन राज्य सरकार अपने अंश से धनराशि जिलों को भेज रही है ताकि बच्चों को जल्द से जल्द यूनिफार्म दी जा सके।
2011 से दी जा रही यूनिफार्म
शिक्षा का अधिकार कानून के बाद 2011-12 में सर्व शिक्षा अभियान के तहत सभी लड़कियों व एससी, एसटी व बीपीएल लड़कों को निशुल्क यूनिफार्म देने का नियम बनाया गया और इस वर्ष 200 रुपये प्रति बच्चा बजट दिया गया। वर्ष 2012-13 से हर बच्चे को दो जोड़ा यूनिफार्म दी जाने लगी। बचे हुए बाकी लड़कों को बेसिक शिक्षा विभाग राज्य के बजट से यूनिफार्म देता है। इससे पहले किताबों या अन्य योजनाओं के बजट से बचे हुए पैसे से लड़कियों को निशुल्क यूनिफार्म दी जाती थी लेकिन ये अधिकतम 100 रुपये जोड़ा ही दिया जाता था।
योजनाओं पर महंगाई का असर नहीं
केंद्र सरकार पाठ्यपुस्तकों के लिए प्राइमरी में 150 रुपये प्रति बच्चा और कक्षा 5 से 8 के लिए 200 रुपये प्रति बच्चा बजट देती है लेकिन राज्य सरकार इसमें 30-35 फीसदी की बचत कर लेती है और कम धनराशि में ही किताबें छपवा कर बंटवा दी जाती हैं। वहीं जूते प्रति जोड़ा 135 रुपये में और प्रति स्वेटर 200 रुपये में दिया जाता है। इसके अलावा मिड डे मील में रसोइयों का मानदेय 1000 रुपये है जो पूरे स्कूल के बच्चों का खाना बनाता है।

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