अगर छात्रा की ये डिमांड मान लेते चिन्मयानंद तो आज साफ बच जाते

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लखनऊ। चिन्मयानंद केस में एसआईटी ने विवेचना पूरी कर चार्जशीट कोर्ट को सौंप दी। केस से जुड़े हुए तमाम राज तो एसआईटी फाश कर चुकी है। अब वह राज आमजन के सामने भी आने लगे हैं। रंगदारी मामले में मुख्य आरोपी संजय सिंह ने एसआईटी को जो बयान दिया था, वह बेहद चौंकाने वाला है। संजय ने कहा कि चिन्मयानंद की वीडियो इसलिए बनाई गई, क्योंकि चिन्मयानंद छात्रा को आधुनिक पार्क में 75 लाख रुपये का फ्लैट और एक कार देने से मुकर गए थे। यह मांग पूरी न होने पर ही छात्रा ने संजय को बताया कि चिन्मयानंद उसका शारीरिक शोषण करते हैं, उनकी वीडियो बना लूंगी। तब छात्रा ने ऑनलाइन चश्मा मंगवाया। उस चश्मे की डिलीवरी संजय सिंह ने मार्च में एसएस कालेज गेट पर ली। चश्मा ले जाकर छात्रा को एसएस लॉ कालेज की लाइब्रेरी में दिया। इसके बाद छात्रा ने वीडियो रिकार्डिंग करनी शुरू कर दी। जब इस मामले में और लोग जुड़े तो फ्लैट और कार से आगे बढ़कर मांग पांच करोड़ तक जा पहुंची।

ऐसे हुई इस केस में विक्रम सिंह की इंट्री

संजय के बयान के मुताबिक, छात्रा ने वीडियो बना ली थी, लेकिन खुद उसके बारे में चिन्मयानंद से कुछ नहीं बताया, लेकिन छात्रा ने चिन्मयानंद से जिद की कि वह उसे फ्लैट और कार खरीद कर दें। चिन्मयानंद नहीं माने तब छात्रा ने संजय से कहा कि स्वामीजी मान नहीं रहे हैं। न कोई पैसा दे रहे हैं और न ही फ्लैट और गाड़ी दे रहे हैं। छात्रा ने संजय से कहा कि वीडियो वायरल करने के लिए किसी मीडिया वाले से बात कर लो। तब इस केस में संजय सिंह ने अपने चचेरे भाई विक्रम को शामिल किया और मीडिया वाले को अरेंज करने को कहा। तब विक्रम ने अपने मौसेरे भाई सचिन को मीडियाकर्मी बना कर चिन्मयानंद के पास भेजा।

संजय ने कहा कि उसे बहुत बाद में पता लगा कि विक्रम ने सचिन को मीडियाकर्मी बना कर चिन्मयानंद के पास भेजा था। संजय ने कहा कि सचिन की व्हाटस ऐप पर चिन्मयानंद से चैटिंग होती रहती थी, उसने एक दिन सचिन का व्हाटस ऐप देख लिया था। वह डबल क्रास कर रहा था। हम लोग हिमाचल गए थे, दिल्ली में रहे, सब बातें चिन्मयानंद को पता थीं। सचिन ही बता रहा था। सचिन चिन्मयानंद का मुखबिर बन गया था। वह हम लोगों को छोड़ कर अपनी सेटिंग कर रहा था। बता दें कि हिमाचल आने-जाने, होटल में ठहरने आदि का पूरा खर्चा सचिन ने उठाया था। चर्चा है कि इसके लिए सचिन को चिन्मयानंद ने ही रुपया उपलब्ध कराया था, लेकिन इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है।

संजय को पता लग गया था कि सचिन और विक्रम मिलकर उसे डबल क्रास कर रहे हैं, तभी छात्रा से संजय ने हिमाचल में ही मंत्रणा की। इसके बाद दिल्ली में सचिन ने अपनी एक गर्ल फ्रेंड के घर पर 20-21 अगस्त को ठहराया। वहां से अगले दिन सब लोग सचिन के घर गाजियाबाद पहुंचे। सचिन के घर पर ही नए मोबाइल नंबर से चिन्मयानंद को पांच करोड़ रुपए रंगदारी का मैसेज 22 अगस्त को भेजा। 23 को शाहजहांपुर से दिव्यांशु ने संजय को बताया कि तुमने क्या किया है कि दो लोगों को एसओजी पकड़ ले गई है। तब संजय ने पूरी बात सचिन और विक्रम को बताई। इस पर सचिन बहुत नाराज हुआ और कहा कि तुम लोग तो पकड़े ही जाओगे, हम भी नहीं बच पाएंगे।

चिन्मयानंद केस में फंसे डीसीबी चेयरमैन डीपीएस राठौर और अजीत सिंह को बुधवार तक समन तामील कराए जा सकते हैं। समन तैयार तो हो गए हैं, लेकिन अभी डिस्पैच में हैं। मंगलवार को कोर्ट में छुटटी है। बुधवार को ही समन तामीली की कार्रवाई हो सकती है। इसके बाद 18 नवंबर तक कार्रवाई शुरू हो पाएगी, ऐसा वकीलों का कहना है।
सौजन्य— हिन्दुस्तान

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