अखिलेश पर साध्वी का वार, कहा-जो अपने बाप का नहीं हुआ वह…

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sadhvi prachi
अखिलेश पर साध्वी का वार, कहा—जो अपने बाप का नहीं हुआ वह…

लखनऊ। राष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष के साथ हाथ मिला चुके पूर्व यूपी सीएम अखिलेश यादव पर वीएचपी की फायरब्रांड नेता साध्वी प्राची ने हमला बोला है। उन्होंने कहा कि ”अखिलेश की शुरू से ही नीति रही है, जो अपने बाप का नहीं हुआ वह दूसरे का क्या होगा।” साध्वी ने कहा कि जहां अखिलेश के पापा जाएंगे वहां अखिलेश कतई नहीं जाएंगे। मुलायम के निर्णय में अखिलेश की संतुष्टि कभी नहीं होती है।

विपक्ष पर बोला हमला
राष्ट्रपति चुनाव को लेकर एक हुए विपक्ष पर हमला बोलते हुए साध्वी ने कहा कि शेर (पीएम मोदी) से डरी हुई सारी भेड़ें एक हो रही हैं, लेकिन 2019 में इनका हाल 2014 से भी बुरा होगा। साध्वी ने कहा कि यह मोदी जी के खिलाफ बौखलाहट का नतीजा है कि विपक्ष ने मीरा कुमार को प्रत्याशी बनाया है। मीरा कुमार बहुत अच्छी महिला हैें। लेकिन रामनाथ कोविंद के आगे उनकी हार तय है। मोदी जी के खिलाफ जो विपक्ष का झुंड बन रहा है उसका बुरा हाल होना है।

क्या कहा अखिलेश यादव पर
सपा संयोजक मुलायम सिंह सीएम योगी की डिनर पार्टी में मोदी के साथ बैठकर खाना खा रहे हैं और अखिलेश यूपीए के साथ हाथ मिला रहे हैं। इस सवाल पर उन्होंने कहा कि अखिलेश की शुरू से ही नीति रही है, जो अपने बाप का नहीं हुआ वह दूसरे का क्या होगा। जहां अखिलेश के पापा जाएंगे वहां वह नहीं जाएंगे। मुलायम के निर्णय में अखिलेश की संतुष्टि कभी नहीं होती है।

बौखला गया है विपक्ष
साध्वी प्राची ने कहा कि विपक्ष बौखलाई हुई है। राष्ट्रपति का पद गरिमापूर्ण पद है। मीरा कुमार भी बहुत अच्छी महिला हैं, विदुषी हैं, लेकिन रामनाथ कोविंद में क्या कमी है। क्या वो दलित चेहरा नहीं हैं? क्या उन्होंने दलितों के लिए काम नहीं किया? क्या वो दलितों के हितैशी नहीं हैं या फिर वे देशभक्त नहीं हैं। विपक्ष केवल मोदी जी को फेल करने के​ लिए ऐसी योजना बना रहे हैं, लेकिन मोदी जी की जो कार्यशैली है, वह विपक्ष पर भारी पड़ेगी। वो दलितों का सम्मान करते हैं। विपक्ष का डिसीजन आने वाले समय में उसके लिए बहुत दुखदाई होने वाला है।

 

मजबूरी में एकत्र हुआ विपक्ष
साध्वी प्राची ने कहा कि मजबूरी में विपक्ष एकत्रित हुआ है। मोदी जी के काम और उनकी नीतियों से विपक्ष पूरी तरह बुझ चुका है। ​यह विपक्ष की गलतफहमी है कि मीरा कुमार उनकी रोशनी बनेंगी।

शेर से डरी हुई भेड़ें हैं विपक्ष का झुंड
भेड़ों के झुंड से एनडीए और बीजेपी को इससे कोई परेशानी नहीं होगी। भारत ही नहीं पूरा विश्व मोदी जी के काम से वाकिफ है। देश का बच्चा बच्चा सिर्फ मोदी मोदी पुकार रहा है। 2019 में फिर मोदी जी आएंगे। जो विपक्ष कभी एक दूसरे के साथ आने को तैयार नहीं था आज वहीं मोदी जी के खिलाफ एकजुट हो गया। मोदी जी के खिलाफ जो विपक्ष का झुंड बन रहा है उसका बुरा हाल होना है। जो हाल इनका 2014 में हुअा उससे भी बुरा हाल इनका 2019 में होने वाला है। शेर से डरी हुई सारी भेड़ें एक हो रही हैं। ये विपक्ष की सारी भेड़े एक होकर भी कुछ नहीं कर पाएंगी।

मायावती पर क्या कहा
रामनाथ कोविंद के बाद मायावती ने अचानक मीरा कुमार का समर्थन करने का ऐलान कर दिया है। इस सवाल पर साध्वी ने कहा कि मायावती दोगली राजनीति करती हैंं। मायावती को दलित के दर्द का कहां मालूम है। अगर उन्हें दलितों का दर्द मालूम होता तो वह उनके लिए काम करतीं। ये तो दौलत की बेटी हैं। सबसे पहले उन्होंने रामनाथ कोविंद का समर्थन करने का ऐलान किया, लेकिन मीरा कुमार के आते ही वह उनके साथ हो गईं। अभी कोई तीसरा आ जाएगा तो ये उनके साथ चली जाएंगी। राजनीति में अब इनका कोई वजूद नहीं है। मायावती खुद राष्ट्रपति की दावेदार थीं। मायावती की यूपी में सरकार नहीं बन पाई उनका सपना चूर चूर हो गया। वह कहतीं कुछ और हैं और करती कुछ और हैं।

क्या कहा अखिलेश यादव पर
सपा संयोजक मुलायम सिंह सीएम योगी की डिनर पार्टी में मोदी के साथ बैठकर खाना खा रहे हैं और अखिलेश यूपीए के साथ हाथ मिला रहे हैं। इस सवाल पर उन्होंने कहा कि अखिलेश की शुरू से ही नीति रही है, जो अपने बाप का नहीं हुआ वह दूसरे का क्या होगा। जहां अखिलेश के पापा जाएंगे वहां वह नहीं जाएंगे। मुलायम के निर्णय में अखिलेश की संतुष्टि कभी नहीं होती है।

कौन हैं मीरा कुमार
राष्ट्रपति उम्मीदवार के रूप में रामनाथ कोविंद और मीरा कुमार दोनों ही योग्य हैं। मीरा कुमार 2009 से लेकर 2014 तक लोकसभा अध्यक्ष के रूप में सफल पारी खेल चुकी हैं। मीरा कुमार अगली पीढ़ी की दलित हैं। मीरा कुमार पूर्व उप प्रधानमंत्री जगजीवन राम की पुत्री हैं और उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के मिरांडा हाउस जैसे प्रतिष्ठ‍ित कॉलेज से पढ़ाई की है। वह 1970 में भारतीय विदेश सेवा के लिए चुनी गई थीं और कई देशों में राजनयिक के रूप में सेवा दे चुकी हैं। मीरा कुमार 72 साल की हैं।

कौन हैं रामनाथ कोविंद

रामनाथ कोविंद उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात में एक कोरी परिवार से हैं। उन्होंने कानपुर के एक कॉलेज से पढ़ाई की और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ने के बाद राजनीति में प्रवेश किया। उनका प्रशासनिक अनुभव बिहार के राज्यपाल के रूप में है। उन्होंने 16 साल तक वकालत की है। कोविंद का चयन भी प्रशासनिक सेवा के लिए हो चुका था, लेकिन उन्होंने नौकरी करने की जगह वकालत करना पसंद किया। रामनाथ कोविंद 71 साल के हैं।

 

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